
प्रसव के दौरान नवजात की मौत, सीएचसी तंबौर के स्टाफ पर लापरवाही का आरोप
परिजनों का दावा—बार-बार रेफर करने की लगाते रहे गुहार, करीब 14 घंटे बाद मृत पैदा हुआ बच्चा थाने में शिकायती पत्र देकर जांच व कार्रवाई की मांग
नैमिष टुडे /संवाददाता
बिसवां/सीतापुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) तंबौर में प्रसव के लिए पहुंची गर्भवती महिला के परिजनों ने अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि समय रहते उचित उपचार और रेफरल न मिलने के कारण प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई। मामले को लेकर पीड़ित परिवार ने थाना तंबौर में शिकायती पत्र देकर जांच कर कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम रकबा बेली मजरा सुमली पोस्ट बेहटा निवासी अनुज कुमार ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 15 सितंबर 2026 को उनकी पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर वह एंबुलेंस से सुबह करीब 10:30 बजे सीएचसी तंबौर पहुंचे। करीब 10:45 बजे अस्पताल में महिला को भर्ती कराया गया।
शिकायतकर्ता के अनुसार, अस्पताल में तैनात एएनएम ने परिजनों को बताया कि बच्चे की धड़कन ठीक है और करीब एक से डेढ़ घंटे में सामान्य प्रसव हो जाएगा। आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी प्रसव नहीं हुआ। इस दौरान परिजन लगातार स्वास्थ्य कर्मियों से महिला की स्थिति देखने की गुहार लगाते रहे। परिजनों का आरोप है कि उनकी बात पर गंभीरता से ध्यान देने के बजाय उन्हें डांट-डपट कर शांत रहने को कहा गया।
रेफर करने की भी लगाते रहे गुहार
अनुज कुमार का आरोप है कि महिला की हालत को लेकर परिजन काफी चिंतित थे और उन्होंने कई बार चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों से मरीज को जिला अस्पताल रेफर करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि सीएचसी में उपचार संभव नहीं था तो समय रहते उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाना चाहिए था, लेकिन उनकी मांग पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
करीब 14 घंटे बाद मृत पैदा हुआ बच्चा
परिजनों के मुताबिक करीब 14 घंटे बाद महिला का प्रसव हुआ, लेकिन नवजात मृत पैदा हुआ। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया। परिजनों का यह भी कहना है कि प्रसूता की हालत भी गंभीर बनी हुई है।
पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अनुज कुमार ने थानाध्यक्ष तंबौर को शिकायती पत्र देकर अस्पताल पहुंचकर मामले की जांच कराने तथा ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
हालांकि नवजात की मौत का वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में अस्पताल प्रशासन या संबंधित स्वास्थ्य विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना उचित होगा।