
यूरिया की तलाश में किसान, ई-केवाईसी में उलझी सरकार! महमूदाबाद में किसानों का फूटा गुस्सा
नैमिष टुडे अनुज कुमार जैन
महमूदाबाद, सीतापुर।
खेतों में फसल बचाने की चिंता किसानों को सड़कों पर ले आई, जबकि व्यवस्था अब भी मोबाइल और ई-केवाईसी के चक्रव्यूह में उलझी नजर आई। महमूदाबाद में यूरिया की बढ़ती कीमत, डीएपी की किल्लत और तकनीकी प्रक्रियाओं से परेशान किसानों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया।
पूर्व नगरपालिका चेयरमैन प्रतिनिधि अमरीश गुप्ता के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने उनके आवास से तहसील तक विशाल आक्रोश रैली निकाली। हाथों में तिरंगा और मांगों से भरी तख्तियां लिए किसान नारे लगाते रहे—”मोदी देउवा यूरिया दै देव, भूखन मर जॉब”। पूरे शहर में किसानों की आवाज गूंजती रही।
किसानों का कहना था कि खेत में खाद चाहिए, लेकिन व्यवस्था उन्हें पहले ई-केवाईसी, फिर स्मार्टफोन और उसके बाद लंबी लाइनों की परीक्षा दे रही है। सवाल यह है कि किसान खेती करे या मोबाइल चलाना सीखे?
अमरीश गुप्ता ने कहा कि समय पर यूरिया और डीएपी उपलब्ध न होने से खेती प्रभावित हो रही है। ऊपर से डिजिटल प्रक्रियाओं का ऐसा जाल बिछा दिया गया है, जिसमें सबसे ज्यादा वही किसान फंस रहा है जिसके नाम पर योजनाएं बनाई जाती हैं।
प्रदर्शनकारी शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए तहसील पहुंचे और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी को सौंपा। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि खाद की उपलब्धता, बढ़ती कीमतों और जटिल प्रक्रियाओं पर शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और व्यापक होगा।
फिलहाल सवाल यही है—सरकार किसानों को समय पर खाद देगी, या फिर अगली फसल भी ई-केवाईसी और पोर्टल के भरोसे ही उगाई जाएगी?