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	<title>लेखनी Archives - Naimish Today</title>
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	<title>लेखनी Archives - Naimish Today</title>
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	<item>
		<title>पाणिनि से एआई स्टैक तक: दिल्ली का एआई गौरव और राष्ट्रीय क्षमता का लक्ष्य</title>
		<link>https://www.naimishtoday.com/archives/34192</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 26 Feb 2026 04:15:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेखनी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; पाणिनि से एआई स्टैक तक: दिल्ली का एआई गौरव और राष्ट्रीय क्षमता का लक्ष्य हरदीप एस पुरी , केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री जब पाणिनि ने बोली जाने&#8230; </p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p>पाणिनि से एआई स्टैक तक: दिल्ली का एआई गौरव और राष्ट्रीय क्षमता का लक्ष्य</p>
<p>हरदीप एस पुरी , केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री</p>
<p>जब पाणिनि ने बोली जाने वाली भाषा की अव्यवस्था को एक संक्षिप्त, गणनीय व्याकरण में परिवर्तित किया, तो उन्होंने एक बात साबित की, जो आज भी प्रासंगिक है: बुद्धिमत्ता सबसे शक्तिशाली तब होती है, जब इसे संरचना के रूप में व्यक्त किया जाता है। नालंदा इस सहज प्रवृत्ति को संस्थानों तक ले गया और बहस करने, संरक्षित करने और ज्ञान को सीमाओं के पार प्रसार करने के तरीके विकसित किए। भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की मेजबानी करने का भारत का निर्णय उसी सभ्यतागत भावना से प्रेरित है, क्योंकि तकनीक में अगली छलांग उन प्रणालियों के बारे में है, जो सीख सकती हैं, तर्क कर सकती हैं और बड़े पैमाने पर कार्य कर सकती हैं और दुनिया ऐसे भविष्य के बारे में सोच नहीं सकती, जिसमें केवल कुछ देश यह तय करें कि ये प्रणालियाँ कैसे बनाई जाएँगी।<br />
पिछले सप्ताह भारत मण्डपम में आयोजित यह शिखर सम्मेलन, एक वैश्विक दक्षिण राष्ट्र द्वारा आयोजित पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन था और किसी भी पूर्व आयोजन में इस स्तर की भागीदारी नहीं देखी गयी: 20 से अधिक राष्ट्राध्यक्ष, 60 मंत्री, 100 से अधिक देशों के 500 से अधिक एआई दिग्गज और विषय-आधारित दस पवेलियनों में 300 प्रदर्शक। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत अपनी स्वयं की एक संगठनात्मक सोच प्रस्तुत कर रहा है: डेटा पर संप्रभुता, डिज़ाइन के अनुसार समावेश और स्वाभाविक जवाबदेही। देश वैश्विक पूंजी को इन शर्तों पर यहाँ निवेश करने के लिए आमंत्रित कर रहा है।<br />
प्रधानमंत्री के एम.ए.एन.ए.वी विजन में इस विचार की स्पष्ट अभिव्यक्ति हुई है: नैतिक पाबंदी, जवाबदेह शासन, डेटा पर संप्रभुता, ताकि ज्ञान के कच्चा माल का उस रूप में निष्कर्षण न किया जाए जैसे कभी वस्तुओं का किया जाता था; व्यापक पहुंच, ताकि लाभ मध्य प्रदेश के किसान तक उतने ही निश्चित रूप से पहुंचे, जितना बेंगलुरु के इंजीनियर तक और कानूनी वैधता, ताकि हर प्रयुक्त प्रणाली लोकतांत्रिक निरीक्षण के प्रति जवाबदेह बनी रहे। उनकी अवधारणा एआई को खुला आकाश देने की है, जबकि नियंत्रण मानव हाथों में रखा जाना चाहिए। यह अवधारणा एक ऐसी रेखा खींचती है, जिसे कई उन्नत अर्थव्यवस्थाएं खींचने में हिचकिचा रही हैं।<br />
अब इन सिद्धांतों का बहुपक्षीय महत्व है, जो शिखर सम्मेलन में अपनाई गई दिल्ली घोषणा के माध्यम से सामने आया, और इसे पहले से ही वैश्विक दक्षिण से आने वाली पहली प्रमुख एआई शासन रूपरेखा कहा जा रहा है। इस घोषणा की दृष्टि विकास-उन्मुख है, जिसका केंद्र तकनीकी-कानूनी दृष्टिकोण है और जो कठोर अनुपालन की तुलना में लचीली पाबंदियों को प्राथमिकता देता है। यह वैश्विक सहयोग को तीन स्तंभों पर व्यवस्थित करता है: लोग, पृथ्वी और प्रगति। भारतजेन जैसा जनसंख्या के पैमाने पर आधारित समाधान, जो 22 भारतीय भाषाओं का समर्थन करता है और उस वास्तविकता को संबोधित करता है कि दुनिया का अधिकांश भाग अंग्रेज़ी में काम नहीं करता। भारत के अपने सब्सिडी वाले जीपीयू एक्सेस (₹65 प्रति घंटा) पर आधारित एक प्रस्तावित वैश्विक कंप्यूट बैंक प्रवेश बाधाओं को हर जगह कम करता है। घोषणा में डेटा संप्रभुता पर जोर दिया गया है, जो सीधे एआई निष्कर्षणवाद को चुनौती देता है: एक पैटर्न, जिसमें विकासशील देशों से डेटा संग्रहित किया जाता है ताकि मॉडल को प्रशिक्षित किया जा सके। बाद में इन देशों को इसी मॉडल के लिए भुगतान करना पड़ता है।<br />
पिछले दशक के कार्यान्वयन ने इस रूपरेखा को विश्वसनीयता दी है, क्योंकि यह सरकार एआई तक किसी श्वेत पत्र के माध्यम से नहीं, बल्कि किसी भी लोकतांत्रिक देश द्वारा शुरू किये गये सबसे महत्वाकांक्षी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना कार्यक्रम के जरिये पहुँची है। यूपीआई ने 2025 में 228 बिलियन से अधिक लेन-देन संसाधित किए, जिनका मूल्य लगभग 3.4 ट्रिलियन डॉलर था, जो दुनिया के वास्तविक समय पर कुल डिजिटल भुगतान का लगभग आधा है और यह वैश्विक स्तर पर वीसा द्वारा संसाधित किये गये कुल लेन-देन से भी अधिक है। जेएएम त्रय ने 2015 से अब तक ₹3.48 लाख करोड़ से अधिक की कल्याण बचत प्रदान की है। किसी अन्य देश ने एक ही नीतिगत व्यवस्था के तहत पहचान, भुगतान और पात्रता-अधिकार के वितरण का निर्माण इस स्तर पर नहीं किया है और यही वह आधारशिला है, जिस पर भारत का एआई खड़ा है।<br />
यदि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का लक्ष्य हर नागरिक को देश से जोड़ना था, तो एआई अवसंरचना का लक्ष्य हर नागरिक को क्षमता से जोड़ना है और यहाँ आंकड़े एक चौंकाने वाला अंतर दिखाते हैं: भारत दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत डेटा का उत्पादन करता है, लेकिन यहाँ वैश्विक डेटा-केंद्र क्षमता का केवल लगभग 3 प्रतिशत मौजूद है। अब इस अंतर को उसी इरादे के साथ पाटा जा रहा है, जिसने यूपीआई का निर्माण किया था: तेज़, बड़े पैमाने पर और संप्रभु डिजाइन के साथ।<br />
विचार करें कि भारत मंडपम में एक ही सप्ताह में क्या घोषणाएँ की गईं। माइक्रोसॉफ्ट: 2030 तक वैश्विक दक्षिण के लिए 50 बिलियन डॉलर, जिसमें से पहले ही 17.5 बिलियन डॉलर की भारत के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की गयी है। गूगल: अमेरिका-भारत संपर्क पहल, जो पांच वर्षों में 15 बिलियन डॉलर से संचालित होगी। अमेज़न वेब सर्विसेज़: महाराष्ट्र में 8.3 बिलियन डॉलर। अदानी समूह: 2035 तक नवीकरणीय ऊर्जा-संचालित एआई डेटा केन्द्रों के लिए 100 बिलियन डॉलर। योटा डेटा सर्विसेज़: एनवीडिया के ब्लैकवेल अल्ट्रा चिप्स का उपयोग करके एशिया के सबसे बड़े एआई कंप्यूटिंग हब में से एक के लिए 2 बिलियन डॉलर से अधिक। लार्सन एंड टुब्रो: एनवीडिया के साथ भारत की सबसे बड़ी गीगावाट-स्केल एआई फैक्ट्री बनाने के लिए प्रस्तावित परियोजना। इंडियाएआई मिशन का राष्ट्रीय कंप्यूट क्लस्टर 38,000 जीपीयू पार कर चुका है और इसे 58,000 तक बढ़ाया जा रहा है, जो स्टार्टअप्स के लिए वैश्विक लागत के लगभग एक तिहाई पर उपलब्ध है। अगले दो वर्षों में एआई अवसंरचना में 200 अरब डॉलर के निवेश का सरकार का लक्ष्य महज आकांक्षा नहीं है; घोषित प्रतिबद्धताएँ इसे हासिल करने के दायरे में लाती हैं।<br />
केंद्रीय बजट 2026-27 का उद्देश्य इस निवेश को दीर्घकालिक संरचनात्मक लाभ में बदलने का है, जो उन विदेशी कंपनियों के लिए टैक्स होलीडे का 2047 तक विस्तार करता है, जो वैश्विक क्लाउड सेवाओं के लिए भारतीय डेटा सेंटर का उपयोग करती हैं तथा एआई और उच्चतम निर्माण स्टार्टअप्स के लिए 1.1 अरब डॉलर के वेंचर कैपिटल फंड का वचन देती हैं। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन, जिसका परिव्यय 34,000 करोड़ रुपये से अधिक का है, लिथियम, कॉबाल्ट और दुर्लभ पृथ्वी धातुओं को सुरक्षित करता है, जिन पर एआई और सेमीकंडक्टर का निर्माण निर्भर होता है।<br />
हालाँकि यह सब तब तक मायने नहीं रखता, जब तक यह लोगों तक नहीं पहुँचता। शिखर सम्मेलन के पहले दिन, 2.5 लाख से अधिक छात्रों ने नवाचार के लिए जिम्मेदार एआई का उपयोग करने की शपथ ली, यह संख्या गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की मान्यता के लिए प्रस्तुत की गई है। तीस डेटा और एआई लैब्स स्तर 2 और स्तर 3 के शहरों में काम कर रहे हैं, जो 570-लैब नेटवर्क की योजना का पहला प्रयास है, जबकि एआईकोश 7,500 से अधिक डेटासेट और 273 मॉडलों को साझा सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में पेश करता है। जब यह सरकार सत्ता में आई थी, तब भारत में 16 आईआईटी थे; आज 23 हैं। ओपनएआई के सीईओ ने बताया कि भारत चैटजीपीटी का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है, जिसके 100 मिलियन साप्ताहिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। खपत यहाँ है, और उत्पादन क्षमता रफ़्तार पकड़ बना रही है: शिखर सम्मेलन में तीन संप्रभु एआई मॉडल पेश किए गए, जिनमें सर्वम एआई का 105-बिलियन-पैरामीटर व्यापक भाषा मॉडल शामिल है, जिसे पूरी तरह भारतीय कंप्यूटिंग और भारतजेन का परम2 पर प्रशिक्षित किया गया है, एक 17-बिलियन-पैरामीटर बहुभाषी मॉडल, जो सभी 22 अनुसूचित भाषाओं का समर्थन करता है। ये विदेशी मॉडलों के अनुकूल किये गये संस्करण नहीं हैं; इन्हें संप्रभु अवसंरचना पर शुरुआत से बनाया गया है।<br />
यह भी जानकारी देने योग्य है कि साझेदारी की संरचना अब कैसे तैयार की जा रही है, क्योंकि अब यह विदेशी तकनीक के लाइसेंस के बारे में नहीं है, बल्कि संप्रभु क्षमता के सह-निर्माण के बारे में है। टाटा समूह की ओपनएआई के साथ रणनीतिक साझेदारी स्टारगेट पहल के तहत 100 मेगावाट एआई-तैयार डेटा सेंटर क्षमता के साथ शुरू होगी और इसका विस्तार एक गीगावाट तक किया जाएगा। इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय उद्योग, वैश्विक ज्ञान परिदृश्य में मांग पक्ष से आपूर्ति पक्ष की ओर आगे बढ़ रहा है। शिखर सम्मेलन के दौरान भारत द्वारा पैक्स सिलीका घोषणा पर औपचारिक हस्ताक्षर अमेरिकी-नेतृत्व वाले गठबंधन में देश को एआई, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षित रखने वाले देशों में शामिल करता है, जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया अन्य सदस्य हैं। इसके साथ ही द्विपक्षीय भारत-अमेरिका एआई अवसर साझेदारी पर हस्ताक्षर किये गये हैं, जो दोनों देशों को महत्वपूर्ण तकनीकों पर नवाचार-प्रवृत्त दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रतिबद्ध करती है, जबकि भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष, 2026 एक और आयाम जोड़ता है, जो संयुक्त कौशल विकास और मापनीय परिणामों से संबंधित है।<br />
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में, वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन श्रृंखला की मेजबानी करने वाला पहला वैश्विक दक्षिण देश केवल एक संवाद आयोजित नहीं कर रहा था, बल्कि उसने यह स्पष्ट कर दिया कि वह किन शर्तों पर प्रतिस्पर्धा करना चाहता है: एक दिल्ली घोषणा पत्र, जो एआई शासन के नियमों को फिर से तैयार करता है, डिजिटल अवसंरचना, जो दुनिया में वास्तविक समय पर होने वाले लगभग आधे भुगतानों को संसाधित करती है, सैकड़ों अरबों की निवेश प्रतिबद्धताएं, पूरी तरह से नए सिरे से बनाए गए संप्रभु मॉडल, और एआई युग की आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा संरचना में प्रवेश। पाणिनि का सबक कभी जटिल नहीं था। संरचना ही बुद्धिमत्ता है। भारत अब उस संरचना का निर्माण कर रहा है।</p>
<p>लेखक केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री</p>
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			</item>
		<item>
		<title>सावित्री ठाकुर, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री, भारत सरकार</title>
		<link>https://www.naimishtoday.com/archives/33869</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Feb 2026 15:08:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेखनी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>SHe-Box पोर्टल: कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा का डिजिटल कवच -सावित्री ठाकुर, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री, भारत सरकार भारत जब 2047 में अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष की&#8230; </p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>SHe-Box पोर्टल: कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा का डिजिटल कवच</p>
<p>-सावित्री ठाकुर, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री, भारत सरकार</p>
<p>भारत जब 2047 में अपनी स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष की ओर अग्रसर है, तब प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने महिला-नेतृत्वित विकास को राष्ट्रीय प्रगति का केंद्र बिंदु बनाया है। महिलाओं की समावेशी आर्थिक वृद्धि में निर्णायक भूमिका को स्वीकार करते हुए सरकार ने ऐसा सुरक्षित, सम्मानजनक और संवेदनशील कार्य वातावरण तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया है, जिससे महिलाएं आत्मविश्वास के साथ कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ सकें। इसी दिशा में कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ के रूप में कार्य करता है।<br />
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने बीते एक दशक में महिला सशक्तिकरण को केवल एक नारा नहीं, बल्कि नीति, संरचना और प्रभावी क्रियान्वयन का विषय बनाया है। “नारी शक्ति” को राष्ट्र की उन्नति का आधार मानते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में व्यापक संस्थागत सुधार किए गए हैं। इसी दूरदर्शी दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण और व्यावहारिक उदाहरण है महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017 में प्रारंभ किया गया SHe-Box पोर्टल, जो कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और न्याय तक सहज पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त डिजिटल मंच के रूप में उभरा है।<br />
आज भारत में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। महिला श्रम बल भागीदारी दर 2017-18 में 23.3% से बढ़कर 2023-24 में 41.7% हो गई। सरकारी और निजी क्षेत्रों के साथ-साथ स्टार्टअप्स, सेवा क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य और असंगठित क्षेत्रों में भी महिलाएँ बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। ऐसे में यह अनिवार्य हो जाता है कि कार्यस्थल सुरक्षित, सम्मानजनक और भय-मुक्त हों। कार्यस्थल पर महिलाओं का उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH Act) इसी उद्देश्य से बनाया गया था। मोदी सरकार ने कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए डिजिटल गवर्नेंस के तहत SHe-Box पोर्टल को 29 अगस्त 2024 को तकनीकी सुधारों के साथ पुनः लॉन्च किया, जिससे यह अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल और पारदर्शी बन सके।<br />
यह पोर्टल देशभर में गठित आंतरिक समितियों (Internal Committees – IC) और स्थानीय समितियों (Local Committees – LC) से संबंधित सूचनाओं का एक केंद्रीकृत भंडार (Central Repository) प्रदान करता है।<br />
SHe-Box पोर्टल का उन्नत संस्करण महिलाओं को सीधे संबंधित IC या LC के पास शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है। इससे शिकायत प्रक्रिया में होने वाली देरी और अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप में कमी आती है। शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक भी कर सकती हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मंच सरकारी या निजी, संगठित या असंगठित &#8211; हर क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिए समान रूप से सुलभ है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मोदी सरकार की महिला सुरक्षा की नीति किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि समावेशी है।<br />
प्रधानमंत्री मोदी के “डिजिटल इंडिया” विज़न के अनुरूप, SHe-Box महिलाओं को सुरक्षित, सरल और गोपनीय तरीके से शिकायत दर्ज करने और उसकी प्रगति ट्रैक करने की सुविधा देता है। पोर्टल पर दर्ज की गई शिकायत सीधे संबंधित कार्यस्थल की आंतरिक समिति या जिले की स्थानीय समिति तक पहुँचती है। गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था की गई है कि आंतरिक समिति की अध्यक्ष के अलावा कोई अन्य व्यक्ति शिकायत का विवरण नहीं देख सकता, जिससे पीड़िता की पहचान सुरक्षित रहती है।<br />
POSH Act के तहत सरकार का दायित्व है कि वह शिकायतों से संबंधित आंकड़ों का संधारण और निगरानी करे। इस अधिनियम के अंतर्गत किसी भी शिकायत की जाँच के लिए 90 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई है, जिसका पालन सुनिश्चित करने में SHe-Box पोर्टल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय द्वारा डैशबोर्ड अलर्ट, ईमेल और मेसेज के माध्यम से नियमित रिमाइंडर भेजे जा रहे हैं। यह सक्रिय प्रणाली मोदी सरकार की उत्तरदायित्व और परिणाम आधारित शासन की सोच को दर्शाती है।<br />
SHe-Box की प्रभावशीलता में नोडल अधिकारियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रत्येक कार्यस्थल पर नियुक्त नोडल अधिकारी, नियोक्ता, आंतरिक/स्थानीय समिति और शिकायतकर्ता के बीच समन्वय स्थापित करते हैं। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि शिकायतें केवल दर्ज न हों, बल्कि उन पर समय पर और नियमानुसार कार्रवाई भी हो।<br />
महिला-केंद्रित नीतियों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखें तो आज देश में 10 करोड़ से अधिक महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं, और लखपति दीदी जैसी पहल के माध्यम से लाखों महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। वहीं नमो ड्रोन दीदी जैसी अभिनव योजनाएँ महिलाओं को आधुनिक तकनीक, कृषि सेवाओं और उद्यमिता से जोड़ते हुए उन्हें नए और औपचारिक कार्यक्षेत्रों में प्रवेश का अवसर दे रही हैं। ऐसे में जब बड़ी संख्या में महिलाएँ पहली बार संगठित और औपचारिक कार्यस्थलों का हिस्सा बन रही हैं, SHe-Box जैसे प्लेटफॉर्म उन्हें यह भरोसा देते हैं कि सरकार उनके साथ खड़ी है &#8211; न केवल कानून बनाकर, बल्कि उसे ज़मीन पर प्रभावी और जवाबदेह ढंग से लागू करके।<br />
बहुभाषी समर्थन, रीयल-टाइम ट्रैकिंग और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से SHe-Box पोर्टल कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को केवल एक कानूनी प्रावधान तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे एक व्यवस्थित, भरोसेमंद और जवाबदेह संस्थागत ढांचे में परिवर्तित करता है।<br />
SHe-Box वास्तव में एक दूरदर्शी विज़न का सशक्त प्रतिबिंब है, जहाँ नारी शक्ति को भय से मुक्त कर, सम्मान और आत्मविश्वास के साथ कार्यस्थलों में आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है, ताकि महिलाएँ अपनी पूरी क्षमता के साथ विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकें।</p>
<p>लेखक महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री, भारत सरकार, हैं</p>
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		<title>विकसित भारत 2047 की ओर स्मार्ट रास्ता – हड़ताल नहीं, बल्कि श्रम संहिता</title>
		<link>https://www.naimishtoday.com/archives/33807</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 05:21:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेखनी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>विकसित भारत 2047 की ओर स्मार्ट रास्ता – हड़ताल नहीं, बल्कि श्रम संहिता डॉ. दीपक जायसवाल, अध्यक्ष, भारतीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय मोर्चा (एनएफआईटीयू) पीढ़ियों से, भारत के श्रमिकों ने&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://www.naimishtoday.com/archives/33807">विकसित भारत 2047 की ओर स्मार्ट रास्ता – हड़ताल नहीं, बल्कि श्रम संहिता</a> appeared first on <a href="https://www.naimishtoday.com">Naimish Today</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>विकसित भारत 2047 की ओर स्मार्ट रास्ता – हड़ताल नहीं, बल्कि श्रम संहिता</p>
<p>डॉ. दीपक जायसवाल, अध्यक्ष, भारतीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय मोर्चा (एनएफआईटीयू)</p>
<p>पीढ़ियों से, भारत के श्रमिकों ने एक पुरानी और टुकड़ों में बंटी श्रम प्रणाली का बोझ उठाया है, जो अक्सर उनके वेतन, सुरक्षा और कार्यस्थल पर गरिमा की रक्षा करने में विफल रही है। असंगठित, संविदा और उभरते गिग क्षेत्रों के करोड़ों श्रमिक नीति-परिदृश्य में अदृश्य रहे हैं और बुनियादी सामाजिक सुरक्षा से वंचित रहे हैं। चार श्रम संहिताएँ इन ऐतिहासिक अन्यायों का सुधार करने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षित प्रयास का प्रतिनिधित्व करती हैं। लगभग तीन दर्जन अलग-अलग कानूनों को एक सुसंगत, एकल ढांचे में लाकर, ये संहिताएँ न्यायसंगत वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और उन लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास करती हैं, जो लंबे समय से वंचित रहे हैं। वर्षों के परामर्श और बहस के बाद इनका कार्यान्वयन, श्रमिकों के अधिकारों को मजबूत करने तथा अधिक स्थिर और मानवतापूर्ण रोजगार वातावरण बनाने में निर्णायक क्षण का प्रतीक है।</p>
<p>एक जिम्मेदार ट्रेड यूनियन संगठन के रूप में, भारतीय ट्रेड यूनियनों का राष्ट्रीय मोर्चा (एनएफआईटीयू), कामगारों की दीर्घकालिक भलाई, गरिमा और सामाजिक सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मोर्चा दृढ़ता से मानता है कि 12 फरवरी को श्रम संहिताओं के खिलाफ हड़ताल में भाग लेना न तो आवश्यक है और न ही वर्तमान समय में श्रमिक वर्ग के सर्वोत्तम हित में है।</p>
<p>श्रम संहिताएं कोई अचानक या एकतरफा हस्तक्षेप नहीं हैं। ये दो दशकों से अधिक समय तक चली सुधार प्रक्रिया का परिणाम हैं। 29 अलग-अलग श्रम कानूनों को चार व्यापक संहिताओं में समेकित करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, ताकि अनुपालन को सरल बनाया जा सके, अस्पष्टता को कम किया जा सके तथा कार्य और रोजगार की बदलती वास्तविकताओं के अनुरूप भारत की श्रम रूपरेखा को आधुनिक बनाया जा सके।</p>
<p>श्रम संहिताओं को पूरी तरह खारिज करना उन मौलिक लाभों की उपेक्षा करता है, जो वे श्रमिकों को प्रदान करने का प्रयास करती हैं। वेतन संहिता सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन कवरेज और समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करती है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में लंबे समय से मौजूद वेतन सुरक्षा के अंतर को दूर किया जा सकता है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, पहली बार, असंगठित, संविदा, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की विधायी रूपरेखा तैयार करती है। इन श्रमिकों की संख्या लगभग 40 करोड़ है और पहले ये श्रमिक औपचारिक सुरक्षा व्यवस्था से बाहर थे। ये प्रावधान भारत में श्रमिकों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा कवरेज का ऐतिहासिक विस्तार प्रस्तुत करते हैं।</p>
<p>औद्योगिक संबंध संहिता तथा पेशे से जुड़ी सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य-परिस्थिति संहिता का उद्देश्य औद्योगिक सद्भाव, तेज विवाद निवारण और सुरक्षित, स्वस्थ व अधिक सम्मानजनक कार्यस्थलों को बढ़ावा देना है। कुछ प्रावधानों को लेकर चिंताएँ हो सकती हैं, अनुभव बताते हैं कि व्यापक विरोध और हड़तालों से शायद ही रचनात्मक परिणाम मिलते हैं। संवाद, नियम-आधारित सुधार और मुद्दा-विशेष पर चर्चा के जरिये श्रमिकों के हित बेहतर तरीके से पूरे किये जा सकते हैं, बजाय इसके कि आपस में टकराव हो, जिससे पारिश्रमिक हानि, उत्पादन में रुकावट और रोजगार असुरक्षा का जोखिम पैदा होता है—विशेष रूप से श्रम बल के सबसे कमजोर वर्गों के लिए।</p>
<p>यह दावा करना भी गलत है कि श्रम संहिताएँ बिना परामर्श के लागू की गई हैं। सुधार प्रक्रिया में त्रिपक्षीय चर्चाओं के कई दौर, संसद की स्थायी समितियों में विचार-विमर्श और विभिन्न हितधारकों के साथ संवाद शामिल थे। एक लोकतांत्रिक प्रणाली में, मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन इन्हें बातचीत और संस्थागत संवाद के माध्यम से हल किया जाना चाहिए, न कि उन व्यवधानों के द्वारा जो अंततः स्वयं श्रमिकों को ही नुकसान पहुंचाते हैं।</p>
<p>जब भारतीय अर्थव्यवस्था संरचनात्मक रूपांतरण के दौर से गुजर रही है और राष्ट्र विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है, श्रमिक संघों को विघटन के बजाय जिम्मेदार कार्रवाई का चयन करना चाहिए। हमारी भूमिका केवल सुधारों का विरोध करना नहीं है, बल्कि उन्हें इस तरह आकार देना है कि श्रमिकों के अधिकार, सामाजिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर गरिमा को प्रभावी क्रियान्वयन और सतत सुधार के माध्यम से व्यावहारिक तौर पर मजबूत किया जा सके।</p>
<p>श्रमिक संघों की वास्तविक जिम्मेदारी केवल विरोध करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मजदूरों को वास्तविक रूप में जमीनी स्तर पर लाभ हो। अब ध्यान इस बात पर होना चाहिए कि श्रम संहिताओं को न्यायपूर्ण तरीके से लागू किया जाए और इन्हें हर उस मजदूर तक पहुँचाया जाए, जिसे सुरक्षा की आवश्यकता है। हड़ताल की बजाय संवाद, सहयोग और निरंतर सुधार चुनकर, श्रमिक संघ एक ऐसा प्रणाली बनाने में मदद कर सकते हैं, जो श्रमिकों के लिए नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और गरिमा प्रदान करती हो और साथ ही 2047 तक विकसित भारत की ओर देश की यात्रा का भी समर्थन करती हो।<br />
भा</p>
<p>रतीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय मोर्चा (एनएफआईटीयू) के अध्यक्ष हैं</p>
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		<title>नैमिषारण्य के तपोवन में विराजते हैं बाबा काशी विश्वनाथ   तीर्थ नगरी नैमिषारण्य में बाबा विश्वनाथ का है पौराणिक मंदिर,</title>
		<link>https://www.naimishtoday.com/archives/28231</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 22 Mar 2025 08:03:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेखनी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नैमिषारण्य के तपोवन में विराजते हैं बाबा काशी विश्वनाथ तीर्थ नगरी नैमिषारण्य में बाबा विश्वनाथ का है पौराणिक मंदिर, नैमिषारण्य, सीतापुर, आनंद तिवारी इन्हें बाबा विश्वेश्वर नाथ के नाम से&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>नैमिषारण्य के तपोवन में विराजते हैं बाबा काशी विश्वनाथ</p>
<p>तीर्थ नगरी नैमिषारण्य में बाबा विश्वनाथ का है पौराणिक मंदिर,</p>
<p>नैमिषारण्य, सीतापुर, आनंद तिवारी</p>
<p>इन्हें बाबा विश्वेश्वर नाथ के नाम से भी जाना जाता है</p>
<p>88 हजार ऋषि मुनियो की पावन तपोभूमि<br />
नैमिषारण्य तीर्थ में स्वयं काशी तीर्थ यहां विराजित है इस काशी क्षेत्र के अधिपति स्वयं बाबा काशीविश्वनाथ है। इस देवस्थान के बारे में यहाँ के प्रबन्धक पं पुरुषोत्तम शास्त्री बताते है कि जब महर्षि दधीचि ऋषि ने वृत्तासुर दैत्य के वध के लिए आवश्यक स्वयं की अस्थियों के दान देने से पहले सभी देवो व तीर्थो के दर्शन की इच्छा जताई है जिस पर देवराज इंद्र ने नैमिष तीर्थ में सभी देवो व तीर्थो को आमन्त्रित किया है तो इस स्थान पर स्वयं भगवान काशी विश्वनाथ जी का आगमन हुआ है जो उसी स्वरूप में आज भी भक्तो को दर्शन देते है मान्यता है कि इस शिवलिंग के दर्शन पूजन से बनारस ( काशी ) के काशी विश्वनाथ के बराबर पुण्य अर्जित होता है , शिवपुराण के अनुसार मान्यता है कि यहां धर्मराज की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने विश्वेश्वर स्वरूप में दर्शन दिया है तब से देवादिदेव यहां स्वयंभू रूप में प्रतिष्ठित है। मंदिर के पास ही काशी के रूप में काशीकुण्ड तीर्थ व देवी अन्नपूर्णा का प्राचीन मंदिर है साथ ही जनकल्याण के लिए जीवित समाधि लेने वाले परमसंत आपानारायण स्वामी का समाधिस्थल है। यहां पूरे वर्ष भक्तों द्वारा दर्शन पूजन का क्रम लगा रहता है।</p>
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		<item>
		<title>2025 की होली पर रमजान के दूसरे सप्ताह के शुक्रवार का दिन-सौहार्द,भाईचारा, प्रेम, सामाजिक समरस्ता का संकल्प लें</title>
		<link>https://www.naimishtoday.com/archives/28098</link>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Mar 2025 06:08:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेखनी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>2025 की होली पर रमजान के दूसरे सप्ताह के शुक्रवार का दिन-सौहार्द,भाईचारा, प्रेम, सामाजिक समरस्ता का संकल्प लें होलिका दहन के साथ हम अपनी नकारात्मकता और बुराइयों का दहन कर&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>2025 की होली पर रमजान के दूसरे सप्ताह के शुक्रवार का दिन-सौहार्द,भाईचारा, प्रेम, सामाजिक समरस्ता का संकल्प लें</p>
<p>होलिका दहन के साथ हम अपनी नकारात्मकता और बुराइयों का दहन कर भाईचारे को मजबूत रंगों में रंगे</p>
<p>अधर्म पर धर्म की विजय हमें आपसी भाईचारे, सद्भाव, सौहार्द और मानवीय सामाजिक समरसता से ही मिलेगी- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र</p>
<p>गोंदिया &#8211; वैश्विक स्तरपर त्योहारों के प्रतीक भारत में आदि अनादि काल, हजारों वर्षों से सभी त्यौहारों को बड़े ही आत्मीयता, उत्साह सौहार्द से मनाने की प्रथा रही है जो आज भी उसी लगन, उत्सव, आनंद से शुरू है।हर साल होली का त्योहार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है. रंगों के त्योहार को होली के नाम से जाना जाता है. इस बार होली का त्योहार 14 मार्च, शुक्रवार को मनाया जाएगा. होली से एक दिन पहले होलिका दहन करने की परंपरा है यानी 13 मार्च को होलिका दहन होगा।<br />
साथियों बात अगर हम 13- 14 मार्च 2025 दो दिवसीय होलीका पर्व उत्सव की करें तो हर भारतीय त्योहार की तरह होली मनाने का भी अपना एक कारण है जिसको जानना आधुनिक युवाओं के लिए ख़ास महत्वपूर्ण है। पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नामक राक्षस राजा का पुत्र प्रहलाद, भगवान विष्णु का परम भक्त था जो उसके राक्षस पिता को पसंद नहीं था और भक्ति से विमुक्ति करने उसने अपनी बहन होलिका को यह जिम्मेदारी सौंपी, जिसे वरदान प्राप्त था कि अग्नि भी उसकी देह को जला नहीं सकती, इसलिए होलिका ने भगत प्रह्लाद को मारने उसे गोद में लेकर अग्नि में प्रवेश हो गई परंतु वह खुद जल गई पर भगत प्रल्हाद का बाल भी बांका नहीं हुआ दूसरी ओर रंग वाली होली पर्व उत्सव राधा-कृष्ण के पावन प्रेम के प्रतीक के रूप में भी मनाई जाती है। समय के बदलते परिपेक्ष में वर्तमान समय में मीडिया में इसे मनाने को लेकर अनेक पर्यावरणीय योग उपचार, स्वास्थ्य संबंधी वैज्ञानिक कारण भी बताए गए हैं। वर्तमान समय में परिस्थितियों बदल गई है, अभी 2025 की होली में रमजान के दूसरे सप्ताह में शुक्रवार के दिन होली भी मनाई जाए जा रही है इसीलिए शासन प्रशासन नागरिकों को विशेष ध्यान रखना होगा। होली के रंग में सराबोर हो आपसी सौहार्द, भाईचारा, प्रेम, सामाजिक समरस्ता का संकल्प लेना होगा शासन प्रशासन मुस्लिम कमेटीयों द्वारा भी प्रशासन द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का पालन करने पर जोर दिया। यह कदम दोनों त्योहारों के शांतिपूर्ण आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। रमजान उल मुबारक दूसरे जुमा की नमाज होली को देखते हुए कमेटी द्वारा गाइडलाइन जारी की गई है।<br />
(1)- रमजान का पाक महीना चल रहा है। 14 मार्च को जुमा भी है और हमारे हम वतनी भाइयों का होली का त्योहार भी है। इस दिन हिंदू भाई रंग खेलेंगे। मुस्लिम बड़ी तादात में मस्जिदों की तरफ जुम्मे की नमाज अदा करने जाएंगे। ऐसे में अपने घर से करीब मस्जिदों में नमाज अदा करें। (2)- जिन रास्तों पर होली का रंग चल रहा हो,ऐसे रास्तों से न गुजरे। बल्कि दूसरे रास्तों का चयन करके मस्जिद पहुंचे। अपनी नमाज अदा करें और अपने घरों को आए। (3)- ये मिश्रित आबादी वाली मस्जिदों पर विशेष ख्याल रखा जाए। दो शिफ्ट में नमाज अदा करें। मस्जिद की जिम्मेदार कमेटी के लोग हालात के मद्देनजर टाइमिंग को सेट कर लें। ताकि नमाज भी मुकम्मल हो जाए और नमाजियों को मस्जिदों तक आने और जाने में किसी तरह की परेशानियां ना हों।(4)- सड़कों पर नमाज न अदा करें। बल्कि मस्जिदों के अंदर से सफ्वंदी करें। तादाद ज्यादा हो तो दो शिफ्ट में नमाज अदा करें।(5)- किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान ना दिया जाए। आपसी भाईचारा बनाए रखें। सद्भावना का संदेश देते हुए दोनों त्योहार को सकुशल संपन्न कराएं। धोखे से या गलती से रंग पड़ जाए तो बहस न करें। मानवता का संदेश देने वाले पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के किरदार को बहैसियते मुसलमान आम करें।(6)- रमजान मुबारक का बरकत वाला महीना चल रहा है ज्यादा से ज्यादा। इबादत में वक्त गुजरे गरीबों, बेव यत्तीम, बीमारो, पड़ोसियों की मदद करें इंसानियत का पैगाम दें। (7)- देश की तरक्की के लिए दुआ करें, मुल्क में अमन चैन कायम रहे। इसके लिए अपनी दुआओं में विशेष ख्याल रखें। इबादत का महीना है। आपकी तरफ से किसी को तकलीफ ना हो। इसका ख्याल रखें। रातों को सड़कों पर नहीं घूमें। बल्कि मस्जिदों और घरों में इबादत करें। अल्लाह और उसके रसूल को राजी करें।<br />
साथियों बात अगर हम भारतीय रेलवे प्रशासन द्वारा रेलवे परिसर में होली हुड़दंग पर नजर रखने की करें तो, होली के त्योहार के दौरान रेलवे में यात्रियों को सुरक्षित यात्रा प्रदान करने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है, ताकि ट्रेनों के साथ-साथ स्टेशनों पर भी गुंडागर्दी पर नजर रखी जा सके। रेलवे अधिकारियों के अनुसार सुरक्षाकर्मी पटरियों, प्लेटफार्मों और ट्रेनों की निगरानी कर रहे हैं. वे त्योहार के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए रेलवे पटरियों के पास रहने वाले ग्रामीणों को शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षाकर्मियों ने ग्रामीणों को जागरूक किया है और उनसे कहा है कि अगर उन्हें पटरियों के पास कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे तो वे इसकी सूचना दें। सुरक्षाकर्मियों ने एंट्री और एग्जिट गेट, प्लेटफार्मों, पार्किंग, ट्रेनों और पटरियों पर गहन जांच और पैदल गश्त शुरू कर दिया है। आपराधिक घटनाओं की रोकथाम और सुरक्षा व्यवस्था के लिए जीआरपी विभिन्न रेलवे स्टेशनों के बाहरी और रेलवे ट्रैक पर गश्त कर रही है और संदिग्ध व्यक्तियों की जांच और निगरानी कर रही है। आगामी त्योहारों के मद्देनजर केंद्रीय रेल मंत्री ने हाल ही में स्टेशनों पर भीड़ नियंत्रण को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक की और कई निर्देश जारी किए थे।<br />
साथियों बात अगर हम रंगों के महोत्सव होली पर क्या करें और क्या नहीं करें को समझने की करें तो (अ) होली पर क्या करें? (1) इस मौके पर होली खेलने के लिए, गुलाल फूल, व साफ पानी का उपयोग करें। (2) सबसे पहले अपने ईष्ट को रंग लगाएं। (3) इस दिन राधा-कृष्ण और शिव-पार्वती की विधिवत पूजा करें। (4) फिर अपने घर के बड़ों को सम्मान के साथ गुलाल लगाएं और उन्हें मिठाई खिलाएं। (5) इसके साथ ही इस मौके पर भगवान विष्णु और धन, प्रचुरता-समृद्धि की देवी लक्ष्मी की पूजा करें। (6) इस दिन ज्यादा से ज्यादा दान-पुण्य करें, क्योंकि इस दिन यह बहुत लाभकारी माना गया है। (7)अपने प्रियजनों के साथ होले खेलें। (8) इस मौके पर सात्विक भोजन करें। (9) इस मौके पर अपने शत्रुओं को भी माफ कर उन्हें प्यार और होली के रंग में रंग दें।(बी )होली पर क्या न करें? (1) इस दिन किसी के साथ विवाद न करें (2) इस दिन बड़ों का अपमान न करें। (3) दूसरों के बारे में बुरा बोलने से बचें। (5) इस शुभ दिन पर तामसिक भोजन खाने से बचें। (6) इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।<br />
साथियों बात अगर हम उपरोक्त पौराणिक और वैज्ञानिक कारणों को मानकर होली मनाने के उद्देश्य समझने की करें तो बुराई में चाहे कितनी भी ताकत हो किंतु अच्छाई की तपिश में खाक हो जाती है। इसलिए हम पिछले दो साल के कोरोनाकाल के दुखदाई क्षणों से उबर रहें हैं तो होलिका दहन के साथ हम अपनी नकारात्मकता और बुराइयों को दहन कर भाईचारे को मजबूत रंगों में रंगेआओ सब मिलकर होली के रंग में सराबोर हो आपसी सौहार्द, भाईचारा, प्रेम सामाजिक समरसता का संकल्प लेकर एक नए मज़बूत भारत में प्रवेश कर अपने विज़न 2047 और 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने की ओर आगे क़दम बढ़ाएं।<br />
साथियों बात अगर हम होली पर्व उत्सव से प्रेरणा की करें तो, अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक, असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक यह त्यौहार हमें बताता है कि अधर्म असत्य कितना भी बलशाही क्यों न हो, हमारी ताकत, संकल्प, जुनून, जांबाज़ी, ज़ज़बे की ताकत उसे ध्वस्त कर देगी। यह ताकत हमें आपसी भाईचारे, सद्भाव, सौहार्द और मानवीय सामाजिक समरसता से ही मिलेगी जिसकी प्रेरणा हमें होली पर्व महोत्सव से लेने की जरूरत है। यह त्यौहार हमें भीतरी विकारों को त्यागने वह नष्ट करने की प्रेरणा सदियों से देता आया है और इस होलिका दहन पर हम सभी के विकारों का इस पवित्र अग्नि के साथ समूल नाश करें।<br />
साथियों बात अगर हम होली पर्व उत्सव को वर्तमान आधुनिक परिपेक्ष में दूषित करने से बचाने की करें तो,होली का त्यौहार भारतीय त्यौहारों में एक महत्व रखता है ,खासकर के पूर्वोत्तर क्षेत्र में। होली का त्यौहार यूं तो आज पूरे विश्व में मनाया जाता है।भारतीय त्योहारों को मनाने के पीछे उसका उद्देश्य छिपा रहता है। यह त्यौहार प्रकृति तथा व्यक्ति के जीवन पर आधारित होता है।इसको मनाने के पीछे वैज्ञानिक तर्क भी कार्य करते हैं। होली के त्यौहार को भारत के विद्वान तथा बुद्धिजीवी लोग तो जानते हैं ,किंतु कुछ असामाजिक तत्व इसकी मर्यादा को भंग करते हैं। मर्यादा से तात्पर्य यह है कि इसके उद्देश्य को क्षति पहुंचाते हैं। यह त्यौहार खुशियां मनाने का है, एक दूसरे के सुख में शामिल होने का है, अपने दुखों को भूल जाने का है। वहीं कुछ लोग इस त्यौहार को दूषित करते हैं अर्थात दारू, मदिरा, भांग, मांस आदि खाकर इस त्यौहार की मर्यादा को तोड़ते है साथ ही वह अपने परिवार तथा समाज के मर्यादाओं को भी क्षति पहुंचाते हैं। और त्योहार की गरिमा को भंग करते हैं? हालांकि यह उनके विवेक पर निर्भर करता है। हमारा उद्देश्य है समाज में त्यौहार की मर्यादा को बनाए रखना तथा उसके प्रति समाज को जागरूक करना। जो व्यक्ति इस मर्यादा को तोड़ता है अथवा भंग करता है उसे हम एक सच्चे समाज के व्यक्ति होने के नाते रोक सकते हैं। इसकी गरिमा को बचाए रखने के लिए इसके वैज्ञानिक तथ्य को उसके समक्ष रख सकते हैं। हम सबसे आशा करते हैं तोहार को त्यौहार के रूप में मनाते रहे इससे दारू, मदिरा तथा मांस आदि का सेवन करके समाज को दूषित ना करें।<br />
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि,2025 की होली पर रमजान के दूसरे सप्ताह के शुक्रवार का दिन-सौहार्द भाईचारा, प्रेम, सामाजिक समरस्ता का संकल्प लें होलिका दहन के साथ हम अपनी नकारात्मकता और बुराइयों का दहन कर भाईचारेको मजबूत रंगोंमें रंगे अधर्म पर धर्म की विजय हमें आपसी भाईचारे,सद्भाव,सौहार्द और मानवीय सामाजिक समरसता से ही मिलेगी।</p>
<p>*-संकलनकर्ता लेखक &#8211; क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र</p>
<p>The post <a href="https://www.naimishtoday.com/archives/28098">2025 की होली पर रमजान के दूसरे सप्ताह के शुक्रवार का दिन-सौहार्द,भाईचारा, प्रेम, सामाजिक समरस्ता का संकल्प लें</a> appeared first on <a href="https://www.naimishtoday.com">Naimish Today</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>भारत सहित राष्ट्रमंडल के 56 देशों का वार्षिक उत्सव व अंतरराष्ट्रीय अद्भुतता दिवस का एक साथ आगाज़ 10 मार्च 2025</title>
		<link>https://www.naimishtoday.com/archives/28003</link>
					<comments>https://www.naimishtoday.com/archives/28003#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 00:08:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेखनी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>भारत सहित राष्ट्रमंडल के 56 देशों का वार्षिक उत्सव व अंतरराष्ट्रीय अद्भुतता दिवस का एक साथ आगाज़ 10 मार्च 2025 राष्ट्रमंडल दिवस 2025 की थीम एक साथ हम आगे बढ़ते&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://www.naimishtoday.com/archives/28003">भारत सहित राष्ट्रमंडल के 56 देशों का वार्षिक उत्सव व अंतरराष्ट्रीय अद्भुतता दिवस का एक साथ आगाज़ 10 मार्च 2025</a> appeared first on <a href="https://www.naimishtoday.com">Naimish Today</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भारत सहित राष्ट्रमंडल के 56 देशों का वार्षिक उत्सव व अंतरराष्ट्रीय अद्भुतता दिवस का एक साथ आगाज़ 10 मार्च 2025</p>
<p>राष्ट्रमंडल दिवस 2025 की थीम एक साथ हम आगे बढ़ते हैं का जबरदस्त आगाज़</p>
<p>राष्ट्रमंडल दिवस पर धार्मिक नागरिक सभाएं स्कूल सभाएं वाद विवाद सांस्कृतिक समारोह तो वहीं अंतर्राष्ट्रीय अद्भुतता दिवसपर गुणों का विकास संदर्भित है-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानी गोंदिया महाराष्ट्र</p>
<p>गोंदिया &#8211; वैश्विक स्तरपर आदि अनादि काल से भारत की कहावतें मुहावरे संतों के वचन आध्यात्मिकता से निकली बातें चाहे वह हजारों वर्ष पूर्व भी कहीं गई कहीं या लिखी गई हो लेकिन वह आज भी सच साबित हो रही है क्योंकि पूर्व में भी उसका नतीजा सकारात्मक रहा है व भविष्य में भी यही सटीकता वाला क्रम चलता रहेगा यह कहावतें एक और एकग्यारह, एकता में बल, एक है तो नेक इत्यादि अनेक कहावतों का परिणाम हम यूरोपीय यूनियन 27 देश, अफ्रीकी संघ चौपन देश, इस्लामिक संघ 54 देश, राष्ट्रमंडल 56 देश इत्यादि हजारों समर्थ प्रमाण है तो वहीं राष्ट्रमंडल देशों के वार्षिक उत्सव 10 मार्च 2025 की थीम भी इन भारत मुहावरों से मिलती-जुलती है कि एक साथ हम आगे बढ़ते हैं। चूँकि राष्ट्रमंडल दिवस पर धार्मिक नागरिक सफाई, स्कूल सभाएं, वाद विवाद, सांस्कृतिक समारोह होते हैं तो वहीं अंतर्राष्ट्रीय अद्भुतता दिवस पर गुणों का विकास संदर्भित है इसलिए आज हम मीडियम उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे भारत सहित राष्ट्रमंडल के 56 देशों का वार्षिक उत्सव व अंतराष्ट्रीय अद्भुतता दिवस का एक साथ ! आगाज़ 10 मार्च 2025<br />
साथियों बात अगर हम 10 मार्च 2025 मार्च के अंत तक चलने वाले 56 देशों के राष्ट्र मंडल दिवस की करें तो राष्ट्रमंडल दिवस राष्ट्रमंडल के 56 देशों का वार्षिक उत्सव है। राष्ट्रमंडल देश प्रशांत, अफ्रीका, एशिया, यूरोप, कैरिबियन और अमेरिका में पाए जाते हैं।राष्ट्रमंडल दिवस का विषय क्या है? हर साल राष्ट्रमंडल दिवस के लिए एक थीम चुनी जाती है। इस साल की थीम है &#8216;एक साथ हम आगे बढ़ते हैं&#8217;।राष्ट्रमंडल देशों में शामिल हैं:यूनाइटेड किंगडम कनाडा ऑस्ट्रेलिया न्यूज़ीलैंड,पापुआ न्यू गिनी सिंगापुर मलेशिया भारत पाकिस्तान बांग्लादेश श्रीलंका<br />
साइप्रस माल्टा जमैका केन्या जाम्बिया घाना नाइजीरिया दक्षिण अफ़्रीका और भी कई! राष्ट्रमंडल के सदस्य देशों ने एक ताकत के रूप में भारत को मान्यता दी है। अफ्रीकी, कैरेबियन और दक्षिण प्रशांत के लगभग सभी राष्ट्रमंडल देशों ने भारत के साथ जिस प्रकार सहयोग बढ़ाया है, उससे अब बेहतर रूप से मान्यता मिली है। राष्ट्रमंडल देशों की कुल आबादी में लगभग 50 पर्सेंट और कुल जीडीपी में लगभग 30 पर्सेंट हिस्सेदारी भारत की है। राष्ट्रमंडल 56 स्वतंत्र देशों का एक स्वैच्छिक संघ है, जिनमें से लगभग सभी पहले ब्रिटिश शासन के अधीन थे। राष्ट्रमंडल की उत्पत्ति ब्रिटेन के भूतपूर्व साम्राज्य से हुई है। राष्ट्रमंडल के कई सदस्य ऐसे क्षेत्र थे जो ऐतिहासिक रूप से विभिन्न समयों पर बसावट, विजय या अधिग्रहण के माध्यम से ब्रिटिश शासन के अधीन आ गए थे।राष्ट्रमंडल के बारे में तथ्य: (1) राष्ट्रमंडल में 2 अरब से अधिक लोग हैं! (2) पृथ्वी पर हर तीन में से एक व्यक्ति राष्ट्रमंडल का हिस्सा है। (3) प्रशांत महासागर में स्थित नाउरू जैसे बहुत छोटे द्वीप भी राष्ट्रमंडल का हिस्सा हैं।(4) ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका राष्ट्रमंडल में ब्रिटेन के साथ शामिल होने वाले पहले देश थे।(5) स्वतंत्रता के लिए लंबे संघर्ष के बाद भारत 1947 में राष्ट्रमंडल में शामिल हुआ। (6) दक्षिण अफ्रीका 1961 में राष्ट्रमंडल से अलग हो गया और 1994 तक राष्ट्रमंडल में वापस नहीं लौटा। (7) 1990 में नामीबिया राष्ट्रमंडल में शामिल होने वाला पहला देश बना जो कभी ब्रिटेन द्वारा शासित नहीं था। (8) 2009 में राष्ट्रमंडल देशों ने राष्ट्रमंडल की 60वीं वर्षगांठ मनाई। राष्ट्रमंडल दिवस कैसे मनाया जाए? हमारे पास बहुत सारे उपयोगी संसाधन हैं जिनका उपयोग आप अपने छात्रों को राष्ट्रमंडल दिवस पढ़ाने और मनाने के लिए कर सकते हैं। हमारे पास वर्कशीट,गतिविधियाँ, पावरपॉइंट और बहुत कुछ है। (1) हम अपनी कक्षा को राष्ट्रमंडल के बारे में पढ़ाने के लिए हमारे राष्ट्रमंडल पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन से शुरुआत करना पसंद करेंगे। (2) हमारे पास एक उपयोगी राष्ट्रमंडल दिवस संसाधन पैक है , जिसमें वह सब कुछ शामिल है जो हमको अपने बच्चों को राष्ट्रमंडल के बारे में सिखाने के लिए चाहिए। इसमें रंग भरने वाली शीट, पावरपॉइंट, शब्द खोज, तथ्य पत्रक, प्रदर्शन पोस्टर और बहुत कुछ शामिल है! (3)यदि हम अपने विद्यार्थियों को राष्ट्रमंडल के अनेक देशों के बारे में सब कुछ सिखाना चाहते हैं, तो यह राष्ट्रमंडल स्थानिक ज्ञान मानचित्र गतिविधि बहुत अच्छी होगी! (4) यदि हम असेंबली पावरपॉइंट की तलाश में हैं, तो और कहीं न जाएँ! हमारे पास यहाँ एक सुंदर राष्ट्रमंडल दिवस असेंबली पावरपॉइंट है! (5) क्यों न हम भी इस राष्ट्रमंडल खेल सूचना पावरपॉइंट पर एक नजर डालें ! और, हमारे निःशुल्क संसाधन कॉमनवेल्थ फ्लैग्स बिंगो को देखें &#8211; जो आपकी कक्षा के साथ करने के लिए एक उत्कृष्ट और मजेदार गतिविधि है। (6) इन राष्ट्रमंडल खेलों के डॉट-टू-डॉट गतिविधि शीट्स पर एक नज़र जरूर डालें।<br />
साथियों बात अगर हम 10 मार्च 2025 को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय अद्भुतता दिवस को समझने की करें तो, हर साल 10 मार्च को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय अद्भुतता दिवस एक ऐसा दिन है, जिस दिन कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कोई भी हो, अपनी अद्भुतता का जश्न मना सकता है। हाँ, हम सभी में ऐसे गुण होते हैं जो हमें किसी न किसी तरह से अद्भुत बनाते हैं। इसलिए आज, अपनी सभी असुरक्षाओं को दूर करें और खुद को वह प्रशंसा देने के लिए तैयार हो जाएँ जिसके आप हकदार हैं। निश्चित रूप से कोई भी व्यक्ति परिपूर्ण नहीं होता। दूसरी ओर, हर कोई अपने तरीके से अद्भुत होता है। हमको बस अपने किसी गुण को उजागर करना है और उस पर ध्यान केंद्रित करना है जो उसे इतना खास बनाता है। इस दिन का उपयोग दूसरों को यह बताकर खुशी साझा करने के लिए करें कि वे कितने अद्भुत हैं अंतर्राष्ट्रीय अद्भुतता दिवस का इतिहास- अद्भुतता&#8217; शब्द के कई सकारात्मक अर्थ हैं। उदाहरण के लिए,यह किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व में उल्लेखनीय गुण को संदर्भित कर सकता है। साथ ही, यह एक ऐसे गुण को दर्शाता है जो दूसरों में विस्मय पैदा करता है। नतीजतन, यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि आजकल इस शब्द का अत्यधिक उपयोग किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय अद्भुतता दिवस एक मजेदार कार्यक्रम है जो सकारात्मकता फैलाने में कामयाब होता है क्योंकि यह वर्ष के ऐसे समय में आयोजित किया जाता है जब अद्भुत लोगों का जश्न मनाने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। हम सोच रहे होंगे कि कोई व्यक्ति अद्भुत कैसे बन जाता है। खैर, एक अद्भुत व्यक्ति वह होता है जो प्रभावशाली, भयानक या प्रेरक होता है। यह कहानी है कि यह दिन कैसे शुरू हुआ? अंतर्राष्ट्रीय अद्भुतता दिवस पहली बार 2008 में केविन लॉवर द्वारा मनाया गया था, जो इस दिन के निर्माता हैं। लॉवर को इस उत्सव का विचार फ्रेडी मानेरो नामक एक प्रशिक्षु के साथ काम करते समय आया था। प्रशिक्षु ने सुझाव दिया था कि लॉवर की अद्भुतता का जश्न मनाया जाना चाहिए,इसलिए इस दिन की घोषणा ट्विटर पर की गई। तब से, इस प्रवृत्ति ने गति पकड़ी है और अब इसे वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है। इसके अलावा, डैन लूरी ने आकर्षक टैगलाइन के साथ आकर इस अवधारणा को और निखारा, &#8220;क्योंकि हर किसी को शानदार होने का बहाना चाहिए। बाद में, लॉवर की बेटी ने भी एक प्रेरणादायक नई टैगलाइन बनाई, कोई भी परिपूर्ण नहीं है, लेकिन हर कोई शानदार हो सकता है। यह तिथि इसलिए भी चुनी गई क्योंकि यह चक नोरिस के जन्मदिन पर पड़ती है &#8211; एक ऐसा व्यक्ति जो अपनी शानदारता के लिए प्रसिद्ध है! इसलिए, चाहे हम कोई भी हों या हम क्या करते हों, इस दिन का उपयोग सिर्फ़ मौजूद रहने और शानदार होने के लिए खुद की पीठ थपथपाने के लिए करें! अंतर्राष्ट्रीय अद्भुतता दिवस की गतिविधियाँ (1) कुछ अद्भुत करो-कुछ ऐसा करें जो आपको लगता है कि इस दिन को वास्तव में मनाने के लिए बहुत बढ़िया है। यह खाना पकाने से लेकर यात्रा करने या बंजी जंपिंग तक कुछ भी हो सकता है। इस दिन के बारे में जागरूकता फैलाएँ (2) इस दिन के बारे में जागरूकता फैलाएं और लोगों को खुश करने के लिए अपनी उत्कृष्टता का जश्न मनाने के संदेश को फैलाएं। (3) साहसी बनें- इस दिन निडर और शानदार बनें, और कुछ ऐसा करें जिससे हम हमेशा डरते रहे हैं। एड्रेनालाईन का जो उछाल आप अनुभव करेंगे, वह हमको कई दिनों तक उत्साहित रखेगा। हम अंतर्राष्ट्रीय अद्भुतता दिवस को क्यों पसंद करते हैं? (1) इससे हमको अच्छा महसूस होता है- यह दिन लोगों को उनके विभिन्न अद्भुत गुणों की याद दिलाने तथा उन्हें स्वयं पर विश्वास क्यों करना चाहिए, यह बताने के लिए समर्पित है। (2) यह हमको लक्ष्य पूरा करने में मदद करता है-यह दिन उन लक्ष्यों को पूरा करने में सहायता करने के लिए प्रेरक का काम करता है, जिन्हें उन्होंने वर्षों से लंबित रखा है। (3) यह आत्मविश्वास बढ़ाने वाला है- चूंकि यह दिन सभी को यह याद दिलाता है कि वे कितने शानदार हैं, इसलिए यह सभी का आत्मविश्वास बढ़ाने में भी सहायक होता है।<br />
अतः अगर हम अपने पूरे विवरण का अध्ययन करें इसका विशेषण करें तो हम पाएंगे किभारत सहित राष्ट्रमंडल के 56 देशों का वार्षिक उत्सव व अंतरराष्ट्रीय अद्भुततादिवस का एक साथ आगाज़ 10 मार्च 2025 राष्ट्रमंडल दिवस 2025 की थीम एक साथ हम आगे बढ़ते हैं का जबरदस्त आगाज़।राष्ट्रमंडल दिवस पर धार्मिक नागरिक सभाएं स्कूल सभाएं वाद विवाद सांस्कृतिक समारोह तो वहीं अंतर्राष्ट्रीय अद्भुतता दिवसपर गुणों का विकास संदर्भित है।</p>
<p>*-संकलनकर्ता लेखक &#8211; क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र</p>
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		<title>साहब! शब्द एक है,मतलब अलग-अलग है- आमंत्रण -निमंत्रण बनाम आरंभ-प्रारंभ</title>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 00:04:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेखनी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>साहब! शब्द एक है,मतलब अलग-अलग है- आमंत्रण -निमंत्रण बनाम आरंभ-प्रारंभ शब्दों के सही मतलब के चयन से व्यक्तित्व में निखार झलकता है, बौद्धिक क्षमता का परिचय होता है बौद्धिक व्यवहार&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>साहब! शब्द एक है,मतलब अलग-अलग है- आमंत्रण -निमंत्रण बनाम आरंभ-प्रारंभ</p>
<p>शब्दों के सही मतलब के चयन से व्यक्तित्व में निखार झलकता है, बौद्धिक क्षमता का परिचय होता है</p>
<p>बौद्धिक व्यवहार के मूल्यांकन का एक स्तंभ, शब्दों की गहराई में जाकर संबंधित स्थिति में शब्द का प्रयोग करना गुणी व्यक्तित्व की पहचान है-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र</p>
<p>गोंदिया &#8211; वैश्विक स्तरपर दुनियाँ के हर देश में अलग- अलग भाषाएं होती है, विशेष रूप से भारत तो भाषाओं लिपियों शब्दों का गहरा समुद्र है,जहां अनेकों ऐसे शब्द हैं जिनका मतलब उनकी परिस्थितियों के अनुसार बदल जाता है या अनेक होते होते है, परंतु इसका मतलब परिस्थितियों की स्थिति के अनुसार निकालना पड़ता है या फिर अनेक शब्द ऐसे होते हैं जिनका अगर एक अक्षर भी बदल जाए तो उसका मतलब ही बदल जाता हैजबकि दो शब्द ऐसे है जैसे आमंत्रण-निमंत्रण व आरंभ-प्रारंभ कई लोग इसका अर्थ एक ही समझते हैं परंतु यह दोनों शब्दों की जोड़ी के प्रत्येक शब्द का उपयोग उस परिस्थितिजन्य स्थिति में किया जाता है। अगर मैं इन सामान शब्दों या एक शब्द को एक वकील या सीए की नजर से देखूं तो एक शब्द के अनेक माईना निकालकर अपने अरगुमेंट को बेस्ट परफॉर्मेंस दे सकता हूं, परंतु इन शब्दों की व्याख्या के लिए भी हमारी वकालत में इंटरप्रिटेशन एक्ट बना हुआ है जो, जज साहब द्वारा जजमेंट देते समय उन शब्दों की व्याख्या उसके अनुसार ही की जाती है, इसलिए वह एक शब्द ही है जो इंसान की जिंदगी बिगाड़ सकता है तो उसकी व्याख्या जिंदगी संवार भी सकता है। दूसरे शब्दों में इसी शब्द की एक लीगल व्याख्या में सजा भी हो सकती है तो दूसरी ओर इसी शब्द की दूसरी व्याख्या में एक्विट्टल यानी छूट भी मिल सकती है। आज हम इस विषय पर चर्चा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि आज मैंने फेसबुक में एक मेल फीमेल के बीच आमंत्रण-निमंत्रण व आरंभ-प्रारंभ शब्दों के मतलब को लेकर एक चर्चा, यू कहें की डिबेट चल रही थी जो आपने- अपने ढंग से इसकी व्याख्या कर रहे थे,फिर मैंनें इस विषय को आर्टिकल लिखने के लिए चुनकर रिसर्च शुरू किया, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्धजानकारी के सहयोग से आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, बौद्धिक व्यवहार के मूल्यांकन का एक स्तंभ शब्दों की गहराई में जाकर संबंधित स्थिति के अनुसार शब्द का प्रयोग करना ही गुणी व्यक्तित्व की पहचान है।<br />
साथियों बात अगर हम आमंत्रण व निमंत्रण के मतलब को समझने की करें तो, दोनों ही किसी को बुलाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं,लेकिन इनमें अंतर होता हैआमंत्रण अनौपचारिक होता है, जबकि निमंत्रण औपचारिक होता है।आमंत्रण में जाने की बाध्यता नहीं होती, जबकि निमंत्रण में जाने की बाध्यता होती है। आमंत्रण और निमंत्रण में अंतर: (1) आमंत्रण में किसी विषय विशेष पर विशेष व्यक्ति को बुलाया जाता है वहीं, निमंत्रण किसी अवसर विशेष पर विशेष व्यक्तियों को बुलाया जाता है।(2) आमंत्रण में लक्ष्य निर्धारित होता है और लक्ष्य प्राप्त होने पर आमंत्रण खत्म हो जाता है वहीं, निमंत्रण में लक्ष्य के साथ लोकाचार भी होता है। (3) आमंत्रण में हर व्यक्ति के पास एक लक्ष्य होता है, वह या तो वक्ता होता है या फिर श्रोता।(4) आमंत्रण से व्यक्ति की प्रतिष्ठा जुड़ती है। (5) आमंत्रण का मतलब होता है- आवाज देना या बुलाना। (6) निमंत्रण एक ऐसा बुलावा है जिसमें जाने की बाध्यता होती है। (7) निमंत्रण पर आपके न जाने पर सामने वाले स्वजन को बुरा भी लग सकता है। (8) आमंत्रण और निमंत्रण दोनों को अंग्रेज़ी में इनविटेशन कहते हैं। निमंत्रण में समय निर्धारित होता है और अतिथि से उसी समय में अनिवार्य तौर पर आने की अपेक्षा की जाती है जबकि आमंत्रण में अनिवार्यता नहीं होती है।निमंत्रण, आमंत्रण से अलग कैसे है (1) निमंत्रण में सिर्फ शारीरिक उपस्थिति उपयोगी है।(2) निमंत्रण में एक आयोजन होता है परंतु प्रत्येक व्यक्ति का लक्ष्य निर्धारित नहीं होता। (3) निमंत्रण में आयोजन पूर्ण होने पर भोजन आदि के साथ उत्सव मनाया जाता है। (4) निमंत्रण सामाजिक मेल मिलाप के लिए होता है। (5) निमंत्रण भारत में लोकाचार का एक उपकरण है। (6) विवाह समारोह में निमंत्रण दिया जाताहै। (7) धार्मिक आयोजनों में निमंत्रण दिया जाता है। (8) पारिवारिक कार्यक्रमों में निमंत्रण दिया जाता है। (9) आमंत्रण और निमंत्रण दोनों किसी को बुलाने के लिए प्रयोग किए जाते हैं। (10) आमंत्रण किसी विषय विशेष पर विशेष व्यक्ति का बुलावा होता है। (11) निमंत्रण किसी अवसर विशेष पर विशेष व्यक्तियों का बुलावा होता है। (12)आमंत्रण में लक्ष्य निर्धारित होता है और लक्ष्य प्राप्त होते ही आमंत्रण समाप्त हो जाता है। (13) निमंत्रण में लक्ष्य के साथ लोकाचार भी होता है। लक्ष्य प्राप्ति के बाद उत्सव होता है। (14) मंच पर वक्ता को आमंत्रित किया जाता है। (15) कार्यक्रम में श्रोता को आमंत्रित किया जाता है।(16) मीटिंग सेमिनार, समाज सेवा के कार्य, कला एवं संस्कृति के आयोजनों में लोगों को आमंत्रित किया जाता है। (17) आमंत्रण में हर व्यक्ति के पास एक लक्ष्य होता है। वह या तो वक्ता होता है या फिर श्रोता। (18) आमंत्रण से व्यक्ति की प्रतिष्ठा जोड़ती है। दोनों ही शब्दों में &#8216;मंत्र&#8217; धातु की एक सी उपस्थिति है। सामान्य रूप से &#8216;आमंत्रण&#8217; और निमंत्रण बुलावे के लिए प्रयुक्त होते है, परंतु &#8216;आ&#8217; और &#8216;नि&#8217; के चलते इनके अर्थो में विशिष्टता आ गई है। इसी विशेषता के कारण ऋषि-मुनियों ने आमंत्रण के बाद निमंत्रण शब्द का अनुसंधान किया। यह बताने की जरूरत नहीं कि हिंदी में एक एक शब्द को प्रचलन में शामिल करने से पहले उस पर काफी अनुसंधान यानी रिसर्च और शास्त्रार्थ यानी डिस्कशन हुए हैं। आमंत्रण और निमंत्रण में व्याकरण का अंतर-आमंत्रण&#8217; और &#8216;निमंत्रण&#8217; दोनों का अर्थ समान समझ लिया जाता है, पर ऐसा नहीं है। दोनों ही शब्दों में &#8216;मंत्र&#8217; धातु की एक सी उपस्थिति है। सामान्य रूप से आमंत्रण और निमंत्रण बुलावे के लिए प्रयुक्त होते है, परंतु &#8216;आ&#8217; और &#8216;नि&#8217; के चलते इनके अर्थो में विशिष्टता आ गई है। इसी विशेषता के कारण ऋषि-मुनियों ने आमंत्रण के बाद निमंत्रण शब्द का अनुसंधान किया। यह बताने की जरूरत नहीं कि हिंदी में एक एक शब्द को प्रचलन में शामिल करने से पहले उस पर काफी अनुसंधान यानी रिसर्च और शास्त्रार्थ यानी डिस्कशन हुए हैं।<br />
साथियों बात अगर हम आरंभ- प्रारंभ के मतलब को समझने की करें तो, हिंदी की अनुभवी शिक्षिका विशेषज्ञ के अनुसार, आरंभ शब्द का अर्थ कोई नया काम शुरू करने से होता है। उदाहरण के लिए, चलिए भोजन आरंभ कीजिए&#8217;। वहीं, जब कोई काम किसी विराम के बाद दोबारा शुरू होता है तब प्रारंभ शब्द का प्रयोग किया जाता है, जैसे- &#8216;तबीयत ठीक होने के बाद उसने विद्यालय जाना प्रारंभ कर दिया है&#8217;। क्या समानता है प्रारंभिक और आरंभिक में ? प्रारंभिक और आरंभिक दो शब्द हैं जो किसी क्रिया, प्रक्रिया, या घटना के संदर्भ में प्रयोग हो सकते हैं और इन दोनों में कुछ समानता हो सकती है, लेकिन ये दोनों अलग-अलग अर्थ प्रकट कर सकते हैं, आवश्यक नहीं है कि ये हमेशा समान हों।प्रारंभिक शब्द सामान्यत: किसी क्रिया, प्रक्रिया या घटना के शुरूआती चरण या स्थिति को सूचित करने के लिए प्रयोग होता है। यह शब्द विशेषत: (1) यह दर्शाता है कि एक क्रिया, प्रक्रिया या घटना का आदि चरण या स्थिति है।(2) इसका प्रयोग किसी प्रक्रिया के पहले चरण के संदर्भ में किया जा सकता है, जैसे कि प्रारंभिक ज्ञान (अर्थात् बेसिक ज्ञान) या प्रारंभिक स्टेज (अर्थात् इवेंट की शुरुआती चरण)।आरंभिक शब्द भी सामान्यत: किसी क्रिया, प्रक्रिया या घटना के शुरूआती चरण को सूचित करने के लिए प्रयोग होता है, लेकिन इसके अलावा यह शब्द विशेषत:(1) यह दर्शाता है कि एक क्रिया, प्रक्रिया या घटना का प्रारंभी चरण है, लेकिन इसके बाद और अधिक चरण हो सकते हैं। (2) आरंभिक शब्द का प्रयोग किसी प्रक्रिया के पहले चरण के संदर्भ में किया जा सकता है, लेकिन यह भी इसके बाद के चरण को सूचित करने के लिए प्रयोग हो सकता है।इसके बावजूद, इन दोनों शब्दों का प्रयोग आपके संदर्भ और वाक्य के साथ बदल सकता है, और इसलिए आपको उनका सटीक अर्थ विशिष्ट संदर्भ के आधार पर समझना होगा। आरंभ और प्रारंभ दोनों अलग कैसे हैं? कार्य की प्रथम शुरुआत आरंभ और कुछ समय के विराम के पश्चात पुनः शुरू करने को प्रारंभ कहा जाता है । मानव जीवन में विद्या का आरंभ बाल्यकाल में ही हो जाता है । सीखने की प्रक्रिया जन्म से मृत्यु तक आजीवन चलती रहती है । पढ़ाई प्रतिदिन एक निश्चित समय पर प्रारंभ करनी चाहिए ।कुछ अन्य उदाहरण :(1) सृष्टि का आरंभ और अंत निश्चित है ।(2) कलयुग का आरम्भ लगभग 4 लाख 32 हजार वर्ष पूर्व हुआ था ।(3) योजना जा शुभारम्भ प्रधानमंत्री द्वारा किया जायेगा (4) आइये, अब हम अपना कार्य प्रारम्भ करें (5) कार्यालय का समय दस बजे प्रातः प्रारम्भ होता है शब्द आरंभ का प्रयोग सबसे उपयुक्त रूप से तब किया जाता है जब किसी गतिविधि या प्रक्रिया की शुरुआत को अधिक अमूर्त, आरंभिक या औपचारिक संदर्भ में संदर्भित किया जाता है। इसे अक्सर गैर-भौतिक प्रक्रियाओं जैसे कि घटनाओं, युगों या अनुभवों के शुरुआती चरणों से जोड़ा जाता है। शब्द आरंभ&#8217; का इस्तेमाल आम तौर पर किसी अधिक विशिष्ट या मूर्त गतिविधि की शुरुआत का वर्णन करने के लिए किया जाता है। यह उन स्थितियों के लिए उपयुक्त है जिनमें शारीरिक क्रियाएँ शामिल हैं, जिसमें मशीनरी या किसी कार्य को शुरू करना शामिल है, और अनौपचारिक सेटिंग्स में भी इसे प्राथमिकता दी जाती है।.? ५&amp;‹ संक्षेप में, आरंभ और शुरुआत आम तौर पर एक दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं, फिर भी शुरुआत को आम तौर पर अधिक औपचारिक या अमूर्त संदर्भों में प्राथमिकता दी जाती है जबकि अनौपचारिक स्थितियों और शारीरिक गतिविधियों के साथ शुरुआत अधिक आम है। आरंभ का तात्पर्य प्रक्रिया के आरंभिक चरण से है, विशेष रूप से गैर-भौतिक या वैचारिक मामलों में। इसके विपरीत, आरंभ अक्सर किसी ठोस या कार्यात्मक चीज़, जैसे कि कोई उपकरण या घटना, को आरंभ करने की क्रिया को संदर्भित करता है। प्रत्येक शब्द का उपयोग कब करना है, यह जानना आपके संचार में सटीकता की एक सूक्ष्म परत जोड़ सकता है।<br />
अतः अगर हम उपयोग पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि साहब! शब्द एक है,मतलब अलग-अलग है- आमंत्रण -निमंत्रण बनाम आरंभ-प्रारंभ।शब्दों के सही मतलब के चयन से व्यक्तित्व में निखार झलकता है, बौद्धिक क्षमता का परिचय होता है बौद्धिक व्यवहार के मूल्यांकन का एक स्तंभ, शब्दों की गहराई में जाकर संबंधित स्थिति में शब्द का प्रयोग करना गुणी व्यक्तित्व की पहचान है।</p>
<p>*-संकलनकर्ता लेखक &#8211; क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र</p>
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		<title>अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2025 की थीम का जबरदस्त आगाज़ &#8211; कार्यवाही में तेज़ी लाएं</title>
		<link>https://www.naimishtoday.com/archives/27998</link>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 10 Mar 2025 00:01:53 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेखनी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2025 की थीम का जबरदस्त आगाज़ &#8211; कार्यवाही में तेज़ी लाएं विज़न 2047 का सशक्त आधार -नारी शक्ति से विकसित भारत अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://www.naimishtoday.com/archives/27998">अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2025 की थीम का जबरदस्त आगाज़ &#8211; कार्यवाही में तेज़ी लाएं</a> appeared first on <a href="https://www.naimishtoday.com">Naimish Today</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2025 की थीम का जबरदस्त आगाज़ &#8211; कार्यवाही में तेज़ी लाएं</p>
<p>विज़न 2047 का सशक्त आधार -नारी शक्ति से विकसित भारत</p>
<p>अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के आर्थिक राजनीतिक व सामाजिक उपलब्धियों एवं कठिनाइयों की सापेक्षता के उपलक्ष में उत्सव है- एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र</p>
<p>गोंदिया &#8211; वैश्विक स्तरपर दुनियाँ के अनेक देशों में पिछले एक सप्ताह से 8 मार्च 2025 को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की उत्सुकता से इंतजार कर रहे थे, क्योंकि इस हफ्ते में संयुक्त राष्ट्र से लेकर दुनियाँ के अनेक देशों में अनगिनत सार्वजनिक व शासकीय स्तरपर भी तैयारीयाँ वेबीनार कार्यक्रम कर रहे थे। कई महिलाएं अपने हित के तोहफे के लिए इंतजार कर रही थी,जैसे दिल्ली (भारत) में महिलाओं को प्रतिमाह 2100 रूपए मिलने जैसे अन्य कारण है, तो आगाज तो होना ही था ।भारत में सर्वोच्च पदों पर आसीन व्यक्तित्वों के बधाई संदेशों नें महिलाओं को प्रोत्साहित किया है, तो भारत सरकार में प्रशासनिक सुधार व लोक शिकायत विभाग ने 6 मार्च 2025 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2025 के उपलक्ष में नारी शक्ति विकसित भारत का वर्चुअल वेबीनार आयोजित किया था। अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस प्रतिवर्ष, 8 मार्च को विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के प्रति सम्मान, प्रशंसा और प्रेम प्रकट करते हुए, महिलाओं के आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों एवं कठिनाइयों की सापेक्षता के उपलक्ष्य में उत्सव के तौर पर मनाया जाता है। यह मनाने के लिए हर साल एक थीम रखी जाती है। इस साल की थीम तेजी से कार्रवाई करें निर्धारित की गई है। यह थीम महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए तेजी से प्रगति करने की अपील करती है। यह लोगों, सरकारों और संगठनों को महिलाओं के उत्थान, समान अवसर प्रदान करने और भेदभाव समाप्त करने की दिशा में सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रेरित करती है। तारीख याद रखें!10-21 मार्च 2025-संयुक्त राष्ट्र दुनिया के सभी क्षेत्रों के सदस्य देशों और गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर लैंगिक समानता की मौजूदा चुनौतियों और उपलब्धियों पर चर्चा करेगा।हम इसे यूएन वेब टीवी के माध्यम से ऑनलाइन देख सकते हैं। चूँकि विज़न 2047 का सशक्त आधार नारी शक्ति से विकसित भारत है तथा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के आर्थिक राजनीतिक व सामाजिक उपलब्धियों एवं कठिनाइयों की सापेक्षता के उपलक्ष में उत्सव है, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग के इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2025 की थीम का जबरदस्त आगाज़ कार्यवाही में तेज़ी लाएं।<br />
साथियों बात अगर हम प्रतिवर्ष 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की करें तो,दुनिया भर में हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं के अधिकार, समानता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के साथ किसी भी क्षेत्र में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के उद्देश्य से मनाया जाता है।यह दिवस को मनाने के लिए हर साल एक नई थीम भी रखी जाती है। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर इस दिवस को मानने के लिए 8 मार्च के दिन को ही क्यों चुना गया, आखिर क्या है इसका इतिहास, महत्व और थीम। इस साल की थीम &#8216;तेजी से कार्रवाई करें महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए तेजी से प्रगति करने की अपील करती है। यह लोगों, सरकारों और संगठनों को महिलाओं के उत्थान, समान अवसर प्रदान करने और भेदभाव समाप्त करने की दिशा में सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रेरित करती है।<br />
साथियों बात अगर हम अंतरराष्ट्रीय परिपेक्ष में वर्तमान समय में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में जन जागरण फैलाने की सख़्त जरूरत की करें तो, पिछले दो साल के दौरान अफ़ग़ानिस्तान, ईरान, यूक्रेन और अमेरिका जैसे कई देशों में महिलाएं अपने अपने देशों में युद्ध, हिंसा और नीतिगत बदलावों के बीच अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही हैं। अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी ने मानव अधिकारों के मामले में तरक़्क़ी को बाधित कर दिया है, क्योंकि महिलाओं और लड़कियों को उच्च शिक्षा हासिल करने से रोक दिया गया गया है,उनके घर से बाहर ज़्यादातर काम करने पर और किसी पुरुष संरक्षक के बग़ैर लंबी दूरी का सफ़र करने पर पाबंदी लगा दी गई है। तालिबान ने महिलाओं को हुक्म जारी किया है कि वो घर से बाहर या दूसरे लोगों के सामने अपना पूरा चेहरा ढक कर रखें। 24 फ़रवरी 2022 को रूस की सेना ने यूक्रेन पर आक्रमण कर दिया था, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन में खाने पीने की कमी, कुपोषण और ग़रीबी के मामले में औरतों और मर्दों के बीच फ़ासला बढ़ गया है।युद्ध के चलते क़ीमतों में उछाल और क़िल्लत के कारण यूक्रेन में महिलाओं के प्रति हिंसा की घटनाओं में बहुत इज़ाफ़ा हो गया है। 24 जून 2022 को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने रो बनाम वेड के एक ऐतिहासिक क़ानून को पलट दिया. इस क़ानून के तहत अमेरिकी महिलाओं को गर्भपात का अधिकार हासिल था, सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद से पूरे अमेरिका में इसके ख़िलाफ़ शोर उठा और विरोध प्रदर्शन हुए, बहुत सी अमेरिकी महिलाएं, गर्भपात के लिए मेक्सिको जाने का विकल्प चुन रही हैं, क्योंकि, 2021 में एक ऐतिहासिक फ़ैसले के बाद, मेक्सिको में गर्भपात कराना जायज़ कर दिया गया था।<br />
साथियों बात अगर हम पिछले कुछ वर्षों से महिलाओं की स्थिति में सुधार की करें तो, हालांकि, पिछले कुछ वर्षों के दौरान महिलाओं की स्थिति में सुधार भी आया है, दस साल के संघर्ष के बाद नवंबर 2022 में यूरोपीय संसद ने एक क़ानून पारित किया, इससे 2026 तक बाज़ार में सार्वजनिक कारोबार करने वाली कंपनियों के बोर्ड में महिलाओं की अधिक नुमाइंदगी सुनिश्चित हो सकेगी. यूरोपीय संघ ने कहा, ऊपरी ओहदे पर बैठने की क़ाबिलियत रखने वाली बहुत सी महिलाएं हैं और अपने नए यूरोपीय क़ानून से हम ये सुनिश्चित करेंगे कि इन महिलाओं को उन ओहदों तक पहुंच पाने का असली मौक़ा मिल सके.इसी बीच, आर्मेनिया और कोलंबिया में पिता बनने पर छुट्टी से जुड़े क़ानूनों में भी बदलाव किया गया है तो वहीं, स्पेन ने माहवारी पर सेहत की छुट्टी लेने और गर्भपात की सुविधाएं बढ़ाने वाले क़ानून पारित किए हैं। भारत में महिलाओं के लिए 33.33 परसेंट कहां आरक्षण कानून बना हुआ है।<br />
साथियों बात अगर हम महिलाओं के लिए 8 मार्च गिफ्ट डे के रूप में मनाने की करें तो, 1995 से पहले, केवल 12 देशों में घरेलू हिंसा के खिलाफ़कानूनी प्रतिबंध थे। आज, 193 देशों में 1,583 विधायी उपाय लागू हैं, जिनमें से 354 विशेष रूप से घरेलू हिंसा को लक्षित करते हैं।<br />
आज, 112 देश ऐसे हैं जिनके पास महिलाओं, शांति और सुरक्षा पर राष्ट्रीय कार्य योजनाएं हैं &#8211; जो 2010 में केवल 19 देशों की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।<br />
साथियों बात अगर हम वर्ष 2025 की थीम कार्यवाही में तेजी लानें की करें तो, सामूहिक रूप से, हम लैंगिक समानता के लिए कार्रवाई में तेजी ला सकते हैं। विश्व आर्थिक मंच के आंकड़ों के अनुसार, प्रगति की वर्तमान दर से, पूर्ण लैंगिक समानता तक पहुंचने में 2158 तक का समय लगेगा, जो कि अब से लगभग पांच पीढ़ियों बाद होगा।कार्रवाई में तेज़ी लाने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करते हुए लैंगिक समानता हासिल करने के लिए त्वरित और निर्णायक कदम उठाने के महत्व पर जोर दिया गया है। इसमें व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों क्षेत्रों में महिलाओं के सामने आने वाली प्रणालीगत बाधाओं और पूर्वाग्रहों को दूर करने में तेज़ी और तत्परता की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।तो, आइये, हम सब मिलकर विश्व भर में प्रगति की दर को बढ़ाने के लिए कार्रवाई में तेजी लाएं। लैंगिक समानता स्थापित करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम समझें कि क्या कारगर है, तथा इसे और अधिक तेजी से किया जाए। त्वरित कार्रवाई एक विश्वव्यापी आह्वान है,जिसका उद्देश्य उन रणनीतियों संसाधनों और गतिविधियों को मान्यता देना है,जो महिलाओं की प्रगति पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं,तथा उनके कार्यान्वयन को समर्थन और बढ़ावा देना है।लैंगिक समानता के मार्ग में महत्वपूर्ण बाधाएं बनी हुई हैं, फिर भी सही कार्रवाई और समर्थन से हर जगह महिलाओं के लिए सकारात्मक प्रगति की जा सकती है। और लैंगिक समानता के लिए कार्रवाई में तेजी लाने में मदद करने का सबसे बड़ा तरीका समर्थकों का समर्थन करना है। दुनियाँ भर में कई प्रभावशाली समूह महिलाओं और लड़कियों की सहायता के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं, हम सभी एकजुटता से उन्हें अपना समर्थन दे सकते हैं। यही कारण है कि 2025 के लिए, आईडब्लूडी ने सभी आयोजनों में महिलाओं पर केन्द्रित धन-संग्रह के तत्व को शामिल करने के लिए एक बड़ा आह्वान किया हैजमीनी स्तर के समूहों से लेकर बड़े पैमाने के निकायों तक, परोपकारी संस्थाएँ महिलाओं और लड़कियों का समर्थन करने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं। व्यक्तिगत रूप से, हम सभी अपने दैनिक जीवन में महिलाओं की प्रगति पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए कदम उठा सकते हैं।हम रूढ़िवादिता को दूर कर सकते हैं, भेदभाव को चुनौती दे सकते हैं, पूर्वाग्रह पर सवाल उठा सकते हैं, महिलाओं की सफलता का जश्न मना सकते हैं, और भी बहुत कुछ कर सकते हैं। इसके अलावा, दूसरों के साथ अपने ज्ञान और प्रोत्साहन को साझा करना महत्वपूर्ण है।दुनिया भर में प्रभावशाली संगठन और समूह कई प्रभावी रणनीतियां, संसाधन और गतिविधियां प्रदान करते हैं जो कई क्षेत्रों में मदद करते हैं, जिनमें शामिल हैं: (1) महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण करना (2) विविध प्रतिभाओं की भर्ती, उन्हें बनाए रखना और उनका विकास करना (3) महिलाओं और लड़कियों को नेतृत्व, निर्णय लेने, व्यवसाय और स्टेम में सहायता प्रदान करना (4) महिलाओं और लड़कियों की आवश्यकताओं को पूरा करने वाले बुनियादी ढांचे का डिजाइन और निर्माण (5) महिलाओं और लड़कियों को उनके स्वास्थ्य के बारे में सूचित निर्णय लेने में मदद करना (6) टिकाऊ कृषि और खाद्य सुरक्षा में महिलाओं और लड़कियों को शामिल करना (7) महिलाओं और लड़कियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण तक पहुंच प्रदान करना (8) खेलों में महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी और उपलब्धि को बढ़ाना (9) महिलाओं और लड़कियों की रचनात्मक और कलात्मक प्रतिभा को बढ़ावा देना (10) महिलाओं और लड़कियों की उन्नति का समर्थन करने वाले अन्य क्षेत्रों पर ध्यान देना।<br />
अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च 2025 की थीम का जबरदस्त आगाज़ &#8211; कार्यवाही में तेज़ी लाएं।विज़न 2047 का सशक्त आधार- नारी शक्ति से विकसित भारत।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, महिलाओं के आर्थिक राजनीतिक व सामाजिक उपलब्धियों एवं कठिनाइयों की सापेक्षता के उपलक्ष में उत्सव है।</p>
<p>*-संकलनकर्ता लेखक &#8211; क़र विशेषज्ञ स्तंभकार साहित्यकार अंतरराष्ट्रीय लेखक चिंतक कवि संगीत माध्यमा सीए(एटीसी) एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र 9284141425*</p>
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		<title>शाबाश डोम्माराजू गुकेश!-18 वर्ष की उम्र में 18 वीं वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप सिंगापूर को जीतकर शतरंज की दुनियाँ में तूफ़ान मचा दिया!</title>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 14 Dec 2024 09:56:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेखनी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शाबाश डोम्माराजू गुकेश!-18 वर्ष की उम्र में 18 वीं वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप सिंगापूर को जीतकर शतरंज की दुनियाँ में तूफ़ान मचा दिया! भारत के डी गुकेश ने चीन की यंगेस्ट&#8230; </p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto">शाबाश डोम्माराजू गुकेश!-18 वर्ष की उम्र में 18 वीं वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप सिंगापूर को जीतकर शतरंज की दुनियाँ में तूफ़ान मचा दिया!</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">भारत के डी गुकेश ने चीन की यंगेस्ट 22 वर्षीय बादशाहत को ख़त्म कर,18.6 वर्षीय यंगेस्ट वर्ल्ड चेस चैंपियन बने</div>
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<div dir="auto">भारत का लोहा पूरी दुनियाँ ने मानां-दुनियाँ के यंगेस्ट वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप उम्र 18.5 वर्ष का भारतीय रिकॉर्ड तोड़ने में अब 100 वर्ष लग सकते हैं-एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र</div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto">गोंदिया &#8211; वैश्विक स्तरपर भारत की बौद्धिक क्षमता का हर क्षेत्र में लोहा पूरी दुनियाँ ने देखा है, जो कुछ वर्षों से पूरे दम ख़म से आगे बढ़कर उच्चस्तर पर रिकॉर्ड बना रहा है, नए-नए अध्याय जुड़तें जा रहे हैं,चाहे वह प्रौद्योगिकी, संचार, विज्ञान, स्वास्थ्य, स्पेस सहित सभी क्षेत्र हो या फिर शिक्षा व खेल क्षेत्र हो, अनेक नवाचार नवोन्मेश से हैरत अंगेश सफलताएं मिल रही है, उसी क्रम में दिनांक 12 दिसंबर 2024 को देर शाम सिंगापुर में हो रही 18 वीं वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप  में मात्र 18.6 वर्ष के डोम्माराजू गुकेश ने यह चैंपियनशिप जीतकर शतरंज की दुनियाँ में तूफान मचा दिया है, इतनी कम उम्र में यह जीत दर्ज कर उन्होंने दिखा दिया है कि कैसे एक बच्चा भी बड़ों बड़ों को हराकर भारत की झोली में यह जीत का तमगा डालकर अविस्मरणीय नया अध्याय जोड़ सकता है,जो पूरी दुनियाँ के लिए चौकाने वाला हैरत अंगेज कारनामा है,इतनी कम उम्र में जो जीत का रिकॉर्ड है,यह मेरा मानना है कि आने वाले 100 वर्षों में भी शायद इस रिकॉर्ड को कोई तोड़ नहीं पाएगा, क्योंकि अभी तक रूस के दिग्गज गैरी कास्पारोव सबसे कम उम्र के शतरंज चैंपियन थे जिन्होंने आज से 39 वर्ष पूर्व 1985 में भारत 22 वर्ष की उम्र में यह ख़िताब उन्होंने जीता था परंतु भारतीय सपूत डी गुकेश ने मात्र 18.6 वर्ष की उम्र में खिताब जीतकर करीब 3.5 वर्ष आगे बढ़ गए हैं जिसे तोड़ना शायद बहुत मुश्किल काम है। चूँकि भारत नें चीन की यंगेस्ट 22 वर्षबादशाहत को खत्म कर 18.6 वर्ष यंगेस्ट वर्ल्ड चेस चैंपियन बने हैं, इसलिए आज हम मीडिया में उपलब्ध जानकारी के सहयोग से इस आर्टिकल के माध्यम से चर्चा करेंगे, शाबाश डोम्माराजू  गुकेश 18 वर्ष की उम्र में 18 वीं वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप की जीत कर शतरंज की दुनियाँ में तूफान मचा दिया है।</div>
<div dir="auto">साथियों बातअगर हम 18 वीं विश्व शतरंज चैंपियनशिप प्रतियोगिता सिंगापुर में भारत के 18 वर्षीय डी गुकेश के इतिहास रचने की करें तो,उन्होंने अपने शानदार खेल से 18 वें वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप को जीतकर इतिहास रच दिया है। डी गुकेश ने सिर्फ 18 साल की उम्र में यह कारनामा कर दिखाया है। ऐसा करने वाले गुकेश दुनियाँ के सबसे युवा ग्रैंडमास्टर बने हैं। गुकेश ने खिताबी मुकाबले में चीन के डिंग लिरेन को हराकर यह उपलब्धि हासिल की है। डी गुकेश ने चैंपियनशिप मुकाबले के 14 वें और आखिरी राउंड में चीन के चैंपियन डिंग लिरेन को कड़ी टक्कर दी, लेकिन अंतिम बाजी भारत के डी गुकेश ने जीतकर खिताब को अपने नाम कर लिया।गुकेश ने 14 बाजी के इस मुकाबले की आखिरी क्लासिकल बाजी जीतकर लिरेन के 6.5 के मुकाबले जरूरी 7.5 अंक के साथ खिताब जीता। यह बाजी हालांकि अधिकांश समय ड्रॉ की ओर जाती दिख रही थी। गुकेश की खिताबी जीत से पहले रूस के दिग्गज गैरी कास्पारोव सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन थे जिन्होंने 1985 में अनातोली कार्पोव को हराकर 22 साल की उम्र में खिताब जीता था।12 साल के बाद किसी भारतीय ने इस खिताब को अपने नाम करने में कामयाबी हासिल की है। इससे पहले दिग्गज विश्वनाथन आनंद ने 2012 में चेस वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब जीता था। गुकेश यह खिताब जीतने वाले दूसरे भारतीय हैं।बुधवार को वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप की 13 वीं बाजी में 68 चाल के बाद गुकेश को गेम ड्रॉ खेलना पड़ा था। तब स्कोर 6.5-6.5 से बराबरी पर था। गुकेश ने तीसरा, 11वां और 14वां गेम जीता। वहीं लिरेन ने पहला और 12 वां गेम जीता। बाकी सभी गेम ड्रॉ रहे। उन्होंने लिरेन को 14वें गेम में से हराया। इसी के साथ स्कोर 7.5-6.5 हो गया और गुकेश चैंपियन बन गए। गुकेश की वर्ल्ड चैंपियनशिप मैच की यात्रा पिछले साल दिसंबर में शुरू हुई जब उन्होंने चेन्नई ग्रैंडमास्टर्स टूर्नामेंट जीतकर कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में जगह बनाई थी। कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में फाबियानो कारूआना और हिकारू नाकामुरा की अमेरिकी जोड़ी को प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन गुकेश ने सभी को पछाड़ते हुए कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर शतरंज की दुनियाँ में तूफान मचा दिया था और इनमें आर प्रज्ञाना नंदा भी शामिल थे। तब गुकेश की उम्र मात्र 17 साल थी। वह कैंडिडेट्स चेस टूर्नामेंट जीतने वाले सबसे युवा प्लेयर थे। शतरंज की दुनियाँ में नया इतिहास रचने वाले डी गुकेश चैंपियन बनते ही फूट-फूट कर रो पड़े,जो खिलाड़ी हमेशा शांत दिखता रहा है, वह विश्व चैंपियन बनने के बाद अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सका। डी गुकेश ने कहा भी कि यह ऐसी उपलब्धि थी, जिसका सपना तो सभी देखते हैं, उन्होंने भी देखा था लेकिन वे इतनी जल्दी चैंपियन बन जाएंगे, इसकी उम्मीद नहीं की थी, शायद यही वजह है कि वे आंसू नहीं रोक पाए।भारत के डी गुकेश ने गुरुवार को फीडे वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप के फाइनल में गत चैंपियन डिंग लिरेन को हराया। दोनों खिलाड़ी एक दिन पहले तक 6.5-6.5 से बराबरी पर थे। गुरुवार को 14वीं बाजी खेली गई, जिसमें डिंग लिरेन ने सफेद मोहरों से शुरुआत की, गुकेश ने इस निर्णायक बाजी में दबाव पर नियंत्रण रखा और गत चैंपियन को हराकर ट्रॉफी अपने नाम कर ली है।</div>
<div dir="auto">साथियों बात अगर हम भारत चीन के खिलाड़ियों के बीच टफ शतरंज चालों की करें तो, यह बाजी अधिकांश समय ड्रॉ की ओर जाती दिख रही थी। विश्लेषकों ने मैच के टाईब्रेकर में जाने की पूरी संभावना जता दी थी लेकिन गुकेश धीरे-धीरे अपनी स्थिति मजबूत कर रहे थे। यह लिरेन की एकाग्रता में क्षणिक चूक थी जिससे ड्रॉ की ओर बढ़ रही बाजी का नतीजा निकला और जब ऐसा हुआ तो पूरा शतरंज जगत हैरान हो गया।55 वीं चाल में गलती कर बैठे लिरेनइन,दोनों खिलाड़ियों के पास आखिरी समय में बस एक रूक (हाथी) और एक बिशप (ऊंट) बचा था, जिसे उन्होंने एक दूसरे को गंवाया, अंत में गुकेश के दो प्यादों के मुकाबले लिरेन के पास सिर्फ एक प्यादा बचा था और चीन के खिलाड़ी ने हार मानकर खिताब भारतीय खिलाड़ी की झोली में डाल दिया।डिंग लिरेन ने 55 वीं चाल में गलती की जब उन्होंने हाथी की अदला-बदली की और गुकेश ने तुरंत इसका फायदा उठाया और अगली तीन बाजी में मुकाबला खत्म हो गया।गुकेश ने गुरुवार को निर्णायक बाजी से पहले तीसरे और 11वें दौर में जीत हासिल की थी।32 वर्षीय लिरेन ने शुरुआती बाजी के अलावा 12 वीं बाजी अपने नाम की थी। अन्य सभी बाजियां ड्रॉ रही साथियों बात अगर हम डी गुकेश के जीवन व उन्हें मिले पुरस्कारों के बारे में जानने की करें तो, गुकेश डी का पूरा नाम डोम्माराजू गुकेश है। वह चेन्नई के रहने वाले हैं। गुकेश का जन्म चेन्नई में 7 मई 2006 को हुआ था।उन्होंने 7 साल की उम्र में ही शतरंज खेलना शुरू कर दिया था। उन्हें शुरू में भास्कर नागैया ने कोचिंग दी थी। नागैया इंटरनेशनल चेस खिलाड़ी रहे हैं और चेन्नई में चेस के होम ट्यूटर हैं। इसके बाद विश्वनाथन आनंद ने गुकेश को खेल की जानकारी देने के साथ कोचिंग दी। गुकेश के पिता डॉक्टर हैं और मां पेशे से माइक्रोबायोलॉजिस्‍ट हैं।गुकेश को मिले 11.45 करोड़ रुपए, इंटरनेशनल चेस फेडरेशन  के 138 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब एशिया के 2 खिलाड़ी वर्ल्ड चैंपियन के खिताब के लिए आमने-सामने थे। क्लासिकल गेम में एक जीत पर प्लेयर को 1.69 करोड़ रुपए मिले। यानी 3 गेम जीतने पर गुकेश को 5.07 करोड़ और 2 गेम जीतने पर लिरेन को 3.38 करोड़ रुपए सीधे ही मिल गए। बाकी प्राइज मनी दोनों प्लेयर्स में बराबर बांटी गई, यानी गुकेश को 11.45 करोड़ और लिरेन को 9.75 करोड़ रुपए का इनाम मिला।</div>
<div dir="auto">साथियों बात अगर हम डी गुकेश को राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री द्वारा दी गई बदायूं की करें तो, राष्ट्रपति ने कहा-विश्व शतरंजचैंपियनशिप जीतने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बनने पर गुकेश को हार्दिक बधाई। उन्होंने भारत को बहुत गौरवान्वित किया है। उनकी जीत शतरंज की महाशक्ति के रूप में भारत की साख को दर्शाती है। गुकेश ने बहुत बढ़िया काम किया है। हर भारतीय की ओर से मैं कामना करती हूं कि आप भविष्य में भी इसी तरह सफल होते रहें।प्रधानमंत्री ने आज गुकेश डी को सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन बनने पर बधाई दी। उन्होंने गुकेश की इस उपलब्धि को ऐतिहासिक और अनुकरणीय बताया।एक्स पर अंतरराष्ट्रीय शतरंज महासंघ के हैंडल की एक पोस्ट का जवाब देते हुए,उन्होंने कहा:ऐतिहासिक और अनुकरणीय!गुकेश डी को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए बधाई। यह उनकी अद्वितीय प्रतिभा, कड़ी मेहनत और अटूट दृढ संकल्प का परिणाम हैउनकी जीत ने न केवल शतरंज के इतिहास में उनका नाम दर्ज कराया है,बल्कि लाखों युवा प्रतिभाओं को बड़े सपने देखने और उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रेरित भी किया है।उनके भविष्य के प्रयासों के लिए मेरी शुभकामनाएं</div>
<div dir="auto">अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर इसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि शाबाश डोम्माराजू गुकेश!-18 वर्ष की उम्र में 18 वीं वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप सिंगापूर को जीतकर शतरंज की दुनियाँ में तूफ़ान मचा दिया!भारत के डी गुकेश ने चीन की यंगेस्ट 22 वर्षीय बादशाहत को ख़त्म कर,18.6 वर्षीय यंगेस्ट वर्ल्ड चेस चैंपियन बने।भारत का लोहा पूरी दुनियाँ ने मानां-दुनियाँ के यंगेस्ट वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप उम्र 18.5 वर्ष का भारतीय रिकॉर्ड तोड़ने में अब 100 वर्ष लग सकते हैं।</div>
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		<title>पिपरिया में जनवादी लेखक संघ का वैचारिक आयोजन : पुस्तक चर्चा के साथ काव्य पाठ भी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[नैमिष टुडे]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 11 Dec 2024 04:20:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[लेखनी]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पिपरिया में जनवादी लेखक संघ का वैचारिक आयोजन : पुस्तक चर्चा के साथ काव्य पाठ भी पिपरिया (कवर्धा)। छत्तीसगढ़ जनवादी लेखक संघ, कवर्धा जिला इकाई द्वारा वैचारिक कार्यक्रम कबिरा खड़ा&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://www.naimishtoday.com/archives/26403">पिपरिया में जनवादी लेखक संघ का वैचारिक आयोजन : पुस्तक चर्चा के साथ काव्य पाठ भी</a> appeared first on <a href="https://www.naimishtoday.com">Naimish Today</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>पिपरिया में जनवादी लेखक संघ का वैचारिक आयोजन : पुस्तक चर्चा के साथ काव्य पाठ भी</p>
<p>पिपरिया (कवर्धा)। छत्तीसगढ़ जनवादी लेखक संघ, कवर्धा जिला इकाई द्वारा वैचारिक कार्यक्रम कबिरा खड़ा बजार में तथा पीएमश्री स्वामी आत्मानंद हायर सेकेण्डरी शाला पिपरिया के सहयोग से 8 दिसंबर 24 को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में दुर्ग के दो साहित्यकारों बद्रीप्रसाद पारकर तथा कमलेश चंद्राकर की पुस्तकों पर चर्चा हुई।</p>
<p>बद्रीप्रसाद पारकर की पुस्तक &#8220;धीरे-धीरे उतरे पार&#8221; पर लेखक एवं पत्रकार नीरज मंजीत ने आलेख पठन करते हुए कहा कि यह जीवनी पठनीय है, प्रेरक और संग्रहणीय भी। दुर्ग जिले के रचनाकारों ने लगातार साहित्य की दुनियां में नाम किया है। उनकी सक्रियता प्रेरणास्पद है। कवर्धा में भी अच्छी टीम बनी है, जो पूरी ऊर्जा से काम कर रही है। कवि एवं समीक्षक अजय चंद्रवंशी ने कहा कि केंवट समाज में जन्में लेखक बद्रीप्रसाद पारकर ने संघर्ष की गाथा को जिस ढंग से लिखा है, वह प्रशंसनीय है। समाज में निचले पायदान पर रहने वाले लोगों का जीवन संघर्ष कितना कठिन होता है, यह हम &#8220;धीरे धीरे उतरे पार&#8221; पढ़कर जान पाते हैं।</p>
<p>कमलेश चंद्राकर की चार बाल कविताओं की किताब पर नरेन्द्र कुमार कुलमित्र ने कहा कि बच्चों के लिए ही नहीं, बड़ों के लिए भी बहुत कुछ सीखने लायक बातें इन किताबों में है। ये कविताएं गाई जा सकती हैं। इनमें संगीत सरल भी है। समीक्षक सुखदेव सिंह अहिलेश्वर ने कमलेश की पुस्तकों पर आलेख वाचन करते हुए हिन्दी की मजबूत बालगीत परंपरा के इतिहास पर बोलते हुए कमलेश चंद्राकर को इसी परंपरा का वर्तमान दौर का महत्वपूर्ण कवि कहा। उपन्यासकार नंदन ध्रुव ने कहा कि आप पढ़ कर जीवन में अपनी दिशा में आगे बढ़ें, किंतु साहित्य को जीवन में महत्व देकर जीवन को सरस जरूर बना सकते हैं। साहित्य व्यक्तित्व को और मजबूत बनाता है। साहित्य से हम एकता, संघर्ष और उदारता का पाठ पढ़ते हैं।</p>
<p>कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष साहित्यकार डॉ. परदेशीराम वर्मा ने छत्तीसगढ़ में जिला इकाइयों की सक्रिय भूमिका के संबंध में बताया। कवि समीक्षक, पत्रकार तथा जनवादी लेखक संघ के प्रदेश महासचिव पी.सी. रथ ने सभा को सम्बोधित करते हुए छात्र-छात्राओं के लिए कविताओं, कथाओं और अन्य कलाओं में भागीदारी को पढ़ाई के तनाव को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण बताया। आज के मोबाईल इंटरनेट युग में उनका इस्तेमाल ज्ञान और करियर को बेहतर मुकाम देने के लिए करने को उन्होंने उदाहरण सहित बताया।</p>
<p>कवर्धा जिला जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष समय लाल विवेक ने स्वागत भाषण दिया। कमलेश चंद्राकर एवं बद्रीप्रसाद पारकर ने अपनी रचना प्रक्रिया के बारे में बताया तथा रचना-पाठ किया। कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य सतीश कुमार बंजारे को डॉ. परदेशीराम वर्मा ने लोककला तथा पंथी नृत्य के हस्ताक्षर देवदास बंजारे पर लिखित पुस्तक आरूग फूल, रायपुर से पधारे जनवादी लेखक संघ के प्रदेश कोषाध्यक्ष नंदन ने अपनी 4 खण्डों में प्रकाशित आत्मकथात्मक उपन्यास तथा पी सी रथ ने युवा कवयित्री डॉ. काव्या की कविताओं का संग्रह स्कूल लाइब्रेरी हेतु भेंट किया।</p>
<p>कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप में में सतीश कुमार बंजारे ने कहा कि ऐसे वैचारिक कार्यक्रमों से बच्चों को प्रेरणा मिलती है। छत्तीसगढ़ के चर्चित साहित्यकारों से मिलकर उनका रचना-पाठ सुनना इन्हें आगे बढ़ने हेतु प्रेरित करेगा। सुखदेव सिंह,भागवत साहू,सात्विक श्रीवास्तव तथा विद्यालय की दो छात्राएं भावना देवांगन तथा सुहानी देवांगन ने स्वरचित रचनाओं का काव्य पाठ किया। कार्यक्रम संचालन भागवत साहू ने किया तथा अंत में आभार प्रदर्शन विद्यालय परिवार की ओर से विनोद चंद्रवंशी द्वारा किया गया।</p>
<p>कार्यक्रम में स्मिता वर्मा, दशरथ सोनी, नीतीश, प्रशांत शर्मा, संजय पराते, सोमप्रकाश वर्मा, संतराम थवाइत , रमेश चौरिया, राजाराम हलवाई, बृजेन्द्र श्रीवास्तव, प्रहलाद पात्रे, अश्विनी कोसरे, नारद चंद्रवंशी, चतुर चंद्रवंशी सहित क्षेत्र के प्रमुख रचनाकार, समाज सेवी, कलाकार भी साहित्य में रुचि रखने वाले छात्रा छात्राओं के साथ उपस्थित थे।</p>
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