सत्यम हॉस्पिटल पर कार्रवाई ठप? खामियां उजागर, फिर भी ‘मौन’ स्वास्थ्य महकमा – जांच या जुगाड़?

सत्यम हॉस्पिटल पर कार्रवाई ठप? खामियां उजागर, फिर भी ‘मौन’ स्वास्थ्य महकमा – जांच या जुगाड़?

संवाददाता/नैमिष टुडे

जनपद लखीमपुर खीरी में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत एक बार फिर सवालों के घेरे में है। मानकों की अनदेखी कर संचालित हो रहे निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के दावे लगातार किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। “सत्यम हॉस्पिटल” का मामला इसी विडंबना का ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां गंभीर अनियमितताएं उजागर होने के बावजूद कार्रवाई अब तक फाइलों से बाहर नहीं निकल सकी है विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, संबंधित अस्पताल की जांच के दौरान कई अहम बिंदुओं पर खामियां चिन्हित की गईं। इनमें स्वास्थ्य सेवाओं के निर्धारित मानकों का पालन न होना, आवश्यक संसाधनों की कमी और संचालन में नियमों की अनदेखी जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। यह स्थिति न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा के साथ जोखिम भी है इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर चुप्पी और कार्रवाई में देरी कई सवाल खड़े कर रही है। क्या जांच महज औपचारिकता बनकर रह गई है, या फिर किसी दबाव के चलते कार्रवाई को रोका जा रहा है यह सवाल अब आम चर्चा का विषय बन चुका है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि मामले को जानबूझकर लंबित रखा जा रहा है। वजह चाहे जो भी हो, लेकिन जिम्मेदार तंत्र की निष्क्रियता साफ तौर पर नजर आ रही है। अगर जांच में खामियां सामने आ चुकी हैं, तो कार्रवाई में देरी का औचित्य समझ से परे है प्रशासनिक जवाबदेही पर उठते सवाल इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है आमतौर पर छोटे मामलों में त्वरित कार्रवाई देखने को मिलती है, लेकिन जब बात बड़े या प्रभावशाली संस्थानों की आती है, तो प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है यह धारणा इस मामले में और मजबूत होती दिख रही है।

*अधिकारियों के बयान*

*सीएचसी अधीक्षक अमित बाजपेई*
“इस मामले को लेकर लगातार फोन आ रहे हैं, मैं कार्यवाही नहीं कर सकता हूं आप जिले के अधिकारी से बात करे वह कार्यवाही करेंगे

*मुख्य चिकित्साधिकारी संतोष कुमार*

“आप उपलब्ध साक्ष्य और जानकारी व्हाट्सएप के माध्यम से साझा करें, उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया देखी जाएगी। लेकिन आज भी कार्यवाही का कोई नामो निशान नहीं है धड़ल्ले से अस्पताल संचालित हो रहा है

*जिलाधिकारी कार्यालय*

“यदि शिकायत से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध कराए जाते हैं, तो संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। जिसके बाद संवाददाता द्वारा साक्ष्य दिए गए जिसके बाद आज भी कार्यवाही शून्य है

अधिकारियों के इन बयानों से यह स्पष्ट होता है कि मामला एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बीच उलझा हुआ है, जबकि ठोस कार्रवाई का अभाव साफ दिखाई दे रहा है जनस्वास्थ्य के साथ समझौता नहीं होना चाहिए स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। यदि मानकविहीन अस्पतालों पर समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो इसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है जिसमें नागरिकों की जान जोखिम दवाईयों व ऑपरेशन के नाम पर अवैध वसूली जैसे कार्य सामने आते है अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं क्या यह मामला निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई तक पहुंचेगा, या फिर “सत्यम हॉस्पिटल” का यह प्रकरण भी अन्य मामलों की तरह कागजी प्रक्रिया में ही सिमटकर रह जाएगा।

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